शनिवार, 5 जून 2021

प्लास्टिक छोड़े ,जीवन से नाता जोड़े, पर्यावरण बचायें

 

प्लास्टिक छोड़े जीवन से नाता जोड़े पर्यावरण बचायें- -  लाल  बिहारी लाल







नई दिल्ली ।  आज भागमभाग भरी  जिंदगी  में  मानव इस कदर उलझ  गया   है  कि  वो न अपने सेहत  पे औऱ  नाहीं प्रकृति  को बचाने  के प्रति ध्यान दे पाता हैं। इसके परिणामस्वरुप वातावरण  दूषित और  स्वंय  बिमार  रहने  लगा है।
                          
  यूं तो प्रकृति  को सबसे ज्यादा खतरा  प्रदूषण से है  क्योंकि  बढ़ती हुई आबादी  की मांग  को पूरा करने के लिए  प्राकृतिक  संसाधनों का दोहन अंधाधुंध हो  रहा  है। जिस कारण जलवायु दूषित हो  चुके है। प्रदूषण  को बढ़ने  या फैलने  के लिए कई कारक  उतरदायी है। उन्हीं कारकों में एक  कारक (प्रदूषक ) प्लास्टिक भी है। जी हां हम  बात कर रहे  है प्लास्टिक  की  जो आज निर्माण  के 120 साल के अंदर ही  समस्त जीवों के लिए  संकट  बनते 

जा  रहा  है। क्योँकि पर्यावरण में इनका विघटन होने में  200-500 साल  तक लग जाते है । प्लास्टिक के ढक्कण का विघटन होने में तो लगभग 1000 वर्ष लग जाते है । ये नन बायोडिग्रेडेबल  पदार्थ है जो वातावरण में आसानी से घूलते नहीं है।
                      
प्लास्टिक एवं पदार्थ का अलग-अलग गुण है। एक गुण के रुप में प्लास्टिक  उन पदार्थों की विशेषता का प्रतीक है जो अधिक  खींचने या तनने के बाद  स्थायी रुप से अपना रुप बदल देते है तो अपने मूल रुप में वापस  नहीं आते  है।  इसके निर्माण का भी एक रोचक कहानी है- एक दिन एक जर्मन केमिस्ट(वैज्ञानिक)  हान्स बोन  पेंचामीन  1898 ई में  डायजोमीथीन का प्रयोग कर रहे थे तभी गलती से प्ला्टिक  का निर्माण हो गया।  जिसके लगभग 35 साल बाद  एक अन्य केमिस्ट (वैज्ञानिक) एरिक फाउसेंट  ने औद्योगिक रुप से  इसका  इस्तेमाल प्रारंभ  किया।  सन 1960 ई में पूरी दुनिया में  प्लास्टिक के  50 लाख टन कचरा फैला था जो आज 609 करोड़ टन से ज्यादा हो गया है । अर्थात  आज  हरेक(हर एक) आदमी के हिस्सें में आधा किलो से ज्यादा प्लास्टिक  का कचरा आ गया है। दुनिया  में 1 करोड़  टन  प्लास्टिक  बैग का प्रतिदिन  उपयोग   करते  है। बात करे भारत की तो केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के  अनुसार  25,940 टन प्रतिदिन प्लास्टिक का उपयोग  हो  रहा है। वही 500 खरब प्लास्टिक बैग पूरी दुनिया में रोजाना प्रयोग किया जा  रहा है। प्लास्टिक बैग जहरीली केमिकल  जायलेन, इसीटोन बेंजोन से मिलकर बने होते है जो सेहत के लिए हानिकारक है।

          
 प्लास्टिक मनुष्य के रीढ की हड्डी की तरह  सामाजिक  हिस्सा बन चुकी है। ये जीवन के हर मोड़ पर सस्ता एंव सुगम होने के कारण  इसका प्रयोग लोग बहुतायत रुप से करते हैं। मानव इसका प्रयोग करने के बाद इसका निपटान भी सही से नहीं कर पाता है । यह पर्यावरण में नही घुलता है यानी कि यह नन बायोडिग्रेडेबल है। इसे  पर्यावरण में  घूलने में 200  से 500 साल तक औऱ बोतल के ढक्कण को तो लगभग 1000 वर्ष घुलने में  लग जाते है । इस बीच जमीन पर परे रहते है जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होने लगती है। नाली जाम हो जाते है जिससे सड़न फैलने लगती है औऱ लोगों के सेहत पर असर पड़ता है।  इधर उधऱ फेकने के कारण नदियों के रास्ते सागर तक पहुँच जाते है और जलीय जीव को नुकसान पहुंचाते हैं। डाल्फिन सहित पूरी दुनिया में लगभग 1 लाख से ज्यादा जलीय जीव समय से पहले काल के गाल में समा जाते है। इसके जलाने  से जहरीली  गैसें निकलती है   जो वातावरण(वायु) को दूषित करती है।  अर्थात  इसके कारण जल, थल एवं नभ  तीनों दूषित  हो रहे है। भारत में तेजी से प्लासटिक का उपयोग बढ़ रहा है। पूरी दुनिया में 28 किलोग्राम प्रति ब्यक्ति प्रतिवर्ष हो रहा है जबकि भारत में इसका उपयोग 11 किलोग्राम प्रति ब्यक्ति प्रतिवर्ष हो रहा है । इसी को ध्यान में रखकर दुनिया के 128 देश पहले ही प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिवंध लगा  चुके है। भारत भी इस कड़ी में सुमार हो गया है। जहां 2 अक्टूबर 2019  से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन हो गया है।  इसकी घोषणा लाल किले से प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को की थी हालाकि पिछले दो दशक से इस पर बातचीत चल रही थी  लेकिन साष्ट्रीय स्तर पर एक्शन में अब आया है ।   प्रधानमंत्री ने दुकानदार भाईयों से कहा कि आप बिल्कुल ही इसका उपयोग न करे और ग्राहकों को भी प्रोत्साहित करे और जनता से भी निवेदन किया है कि भारत को प्रदूषण रोकने में मदद कीजिये और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग नहीं कीजिये।  क्योंकि प्लास्टिक को खाने से रोजाना देश के किसी न किसी कोने में गाये मर रही है। इसलिए जरुरी है कि अपने स्वास्थ्य औऱ आने वाली पीढ़ी को बेहतर पर्यावऱण देने के लिए प्लास्टिक से नाता छोड़े जीवन से नाता जोड़े। आम जन आगे आये तभी सरकार की यह पहल कामयाब  हो पायेगी। आने वाले दिनों में देखना है कि से कितना पर्यावरण सुधार होगा। 

लेखक- पर्यावरण पर्यावरण प्रेमी

  


मंगलवार, 1 जून 2021

साहित्य टी.वी.,साहित्यिक उड़ान का सुगम मंच-लाल बिहारी लाल

 

       साहित्य टी. वी. ने मनाया पहली बर्षगांठ

 

नीरज पांडे


नई दिल्ली। आज देश करोना महामारी से जूझ रहा है। इससे निपटने के लिए सबसे पहले लाँक डाउन का सहारा लिया गया। लोग अचानक घरों में कैद हो गये। ऐसे में साहित्यकारों के सकारात्मक सोंच को बढ़ावा देने और रचनात्मक लेखनी को देश दुनिया में पहुँचाने के उदेश्य से 18 मई 2020 को साहित्य टी.वी. की नींव रखी गई। इसकी शुरुआत 1 जून 2020 को इंदौर के ऊषा गुप्ता की शुभकामनाओं        ‘सबका हित साहित्य में’ से शुरु हुई  औऱ आज देश के कोने-कोने से 100 से ज्यादा साहित्यकारों को मंच प्रदान की गई  और आज 500 वाँ विडियो असम की लेखिका शमां जैन सिगल की प्रसारित की गई।

  आज इसकी पहली वर्षगांठ पर देश को कोने-कोने से साहित्यकार बधाई दे रहे हैं। उनमें मुजफपरनगर से डा. कीर्तिवर्धन, कानपुर से ड़ा कमलेश शुक्ला कीर्ति, गोरखपुर से राजकुमार सिंह,प्रतापगढ़ से सुरेन्द्र कुमार शुक्ल,इंदौर से ऊषा गुप्ता, गाजियाबाद से संतोष भोजपुरिया, मुम्बई से विनय महाजन, नोयड़ा से अनिल कुमार, राजकुमार अग्रवाल,दिल्ली से नीरज पांडे, सोनू गुप्ता, मनोज सिंह, प्रदीप भट्ट, जय प्रकाश गौतम,सुरेश मिश्र अपराधी,सुभाष प्रसाद,जगदीश चंद्र शर्मा आदी शामिल है। इसके संपादक लाल बिहारी लाल का कहना है कि इस डिजीटल दौड़ में देश के साथ-साथ विदेश के साहित्यकारों को भी मंच सुलभ कराया जायेगा , अभी तक हिंदी भोजपुरी,गढवाली,कुमाउनी,संस्कृत आदी भाषाओं को शामिल किया गया है और आगे अन्य भाषाओं को भी विस्तार दिया जायेगा। इस मंच पर साहित्य के हर विद्धा का प्रसारण किया जाता है चाहे कविता,कहानी,गीत ,गजल, साहित्यिक खबरे, प्ररक प्रसंग ,हास्य ब्यंग्य आदि शामिल है। साहित्य टी.वी. यूं ही साहित्य के पटल पर अपना परचम देश दुनिया में लहराता रहे।


शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

सरल सहज ब्यक्तित्व के लाल- लाल बिहारी लालःडा पूरन सिंह

 सरल सहज ब्यक्तित्व के लाल- लाल बिहारी लालःडा पूरन सिंह

 




 नई  दिल्ली। लाल बिहारी लाल जी से मेरी मुलाकात हम सब साथ-साथ के कार्यकारी संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव जी के माध्यम से हुई। जैसा ब्यक्तित्व श्री किशोर श्रीवास्तव जी का है उन्होने अपने ही ब्यक्तित्व जैसे ब्यक्ति से मिलवा दिया । जब तक मैं नहीं मिला था श्री लाल साहेब से तब तक कुछ और छवि थी मेरे मन में उनके लिए लेकिन जब मिला तो उसके विपरीत भोला-भाला,मासूम-सा,सीधा-साधा, रहन-सहन साधारण से लिवास में छिपी अनुठी प्रतिभा का मैं कायल हो गया। मुझे खुशी हुई कि साहित्य जगत में कोई साहित्य सृजक भी है,नहीं तो साहित्य सृजन की भूमि पर उर्वरक कम विध्वंसक ज्यादा हैं जो अपने ही लेखन पर  अभिमान को है। और  ये किसी को भी कुछ नहीं समझते। लाल साहेब में ऐसा कुछ भी नहीं लगा। स्वाभिमानी और दृढ निश्चयी लाल साहब सभी को स्नेह एवं सम्मान देने वाले सशक्त ब्यकति हैं। मुझे लगता हैं उनसे कुछ सीखा जा सकता है। कितनी तत्परता से और सहजता से वे अपने आप को साहित्य के प्रति समर्पित कर सभी के दिलो में अपना स्थान बना लेते हैं।
     वे न सिर्फ लेखक ही है बल्कि  समाजसेवी भी हैं। उन्होने न केवल हिन्दी साहित्य में ही बल्कि भोजपरी साहित्य में भी अपना स्थान बनाया है। टिलिबिजन हो या रेडियो, प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रोनिक मिडीया,उनकी दोनो पर ही बेहतरीन पकड है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ,साहित्य सृजन करने के साथ-साथ  वे आडियो कैसेट्स के माध्यम से भोजपुरी मनोरंजन जगत में  भी छाए हुए हैं।
    कला, संस्कृति एवं सामाजिक चेतना मंच के लिए दृढ संकल्प रखने वाले लाल साहब की रचनाओं को जब पढता हूँ तो सहज भाव से लिखी गई उनकी रचनाएं मन में अन्दर तक बैठ जाती है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओ के ब्यूरो प्रमुख होने के साथ-साथ वह विभिन्न पुरस्कारों  से लवरेज भी हैं। उनकी साहित्यिक साधना यूं ही बनी रहे यही चाहता हूँ।और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि भविष्य में  भी उचाईंयों और साहित्य शिखर पर बढते रहे। उन्हें सादर प्रणाम ।

                            सहायक निदेशक,कृषि मंत्रालय,भारत सरकार