शनिवार, 5 जून 2021
प्लास्टिक छोड़े ,जीवन से नाता जोड़े, पर्यावरण बचायें
प्लास्टिक छोड़े जीवन से नाता जोड़े पर्यावरण बचायें- - लाल बिहारी
लाल
जा रहा है। क्योँकि पर्यावरण में इनका विघटन होने में 200-500 साल तक लग जाते है । प्लास्टिक के ढक्कण का विघटन होने में तो लगभग 1000 वर्ष लग जाते है । ये नन बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है जो वातावरण में आसानी से घूलते नहीं है।
बुधवार, 2 जून 2021
मंगलवार, 1 जून 2021
साहित्य टी.वी.,साहित्यिक उड़ान का सुगम मंच-लाल बिहारी लाल
साहित्य टी. वी. ने मनाया पहली बर्षगांठ
नीरज पांडे
नई दिल्ली। आज देश करोना महामारी से जूझ
रहा है। इससे निपटने के लिए सबसे पहले लाँक डाउन का सहारा लिया गया। लोग अचानक
घरों में कैद हो गये। ऐसे में साहित्यकारों के सकारात्मक सोंच को बढ़ावा देने और
रचनात्मक लेखनी को देश दुनिया में पहुँचाने के उदेश्य से 18 मई 2020 को साहित्य टी.वी.
की नींव रखी गई। इसकी शुरुआत 1 जून 2020 को इंदौर के ऊषा गुप्ता की शुभकामनाओं ‘सबका हित साहित्य में’ से शुरु हुई औऱ आज देश के कोने-कोने से 100 से ज्यादा साहित्यकारों
को मंच प्रदान की गई और आज 500 वाँ विडियो
असम की लेखिका शमां जैन सिगल की प्रसारित की गई।
आज इसकी पहली वर्षगांठ पर देश को कोने-कोने से साहित्यकार बधाई दे रहे हैं। उनमें
मुजफपरनगर से डा. कीर्तिवर्धन, कानपुर से ड़ा कमलेश शुक्ला कीर्ति, गोरखपुर से
राजकुमार सिंह,प्रतापगढ़ से सुरेन्द्र कुमार शुक्ल,इंदौर से ऊषा गुप्ता, गाजियाबाद
से संतोष भोजपुरिया, मुम्बई से विनय महाजन, नोयड़ा से अनिल कुमार, राजकुमार
अग्रवाल,दिल्ली से नीरज पांडे, सोनू गुप्ता, मनोज सिंह, प्रदीप भट्ट, जय प्रकाश
गौतम,सुरेश मिश्र अपराधी,सुभाष प्रसाद,जगदीश चंद्र शर्मा आदी शामिल है। इसके
संपादक लाल बिहारी लाल का कहना है कि इस डिजीटल दौड़ में देश के साथ-साथ विदेश के
साहित्यकारों को भी मंच सुलभ कराया जायेगा , अभी तक हिंदी भोजपुरी,गढवाली,कुमाउनी,संस्कृत
आदी भाषाओं को शामिल किया गया है और आगे अन्य भाषाओं को भी विस्तार दिया जायेगा। इस
मंच पर साहित्य के हर विद्धा का प्रसारण किया जाता है चाहे कविता,कहानी,गीत ,गजल,
साहित्यिक खबरे, प्ररक प्रसंग ,हास्य ब्यंग्य आदि शामिल है। साहित्य टी.वी. यूं ही
साहित्य के पटल पर अपना परचम देश दुनिया में लहराता रहे।
मंगलवार, 1 दिसंबर 2020
सोमवार, 23 नवंबर 2020
मंगलवार, 17 नवंबर 2020
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020
सरल सहज ब्यक्तित्व के लाल- लाल बिहारी लालःडा पूरन सिंह
सरल सहज ब्यक्तित्व के लाल- लाल बिहारी लालःडा पूरन सिंह
नई दिल्ली। लाल बिहारी लाल जी से मेरी मुलाकात हम सब साथ-साथ के कार्यकारी संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव जी के माध्यम से हुई। जैसा ब्यक्तित्व श्री किशोर श्रीवास्तव जी का है उन्होने अपने ही ब्यक्तित्व जैसे ब्यक्ति से मिलवा दिया । जब तक मैं नहीं मिला था श्री लाल साहेब से तब तक कुछ और छवि थी मेरे मन में उनके लिए लेकिन जब मिला तो उसके विपरीत भोला-भाला,मासूम-सा,सीधा-साधा, रहन-सहन साधारण से लिवास में छिपी अनुठी प्रतिभा का मैं कायल हो गया। मुझे खुशी हुई कि साहित्य जगत में कोई साहित्य सृजक भी है,नहीं तो साहित्य सृजन की भूमि पर उर्वरक कम विध्वंसक ज्यादा हैं जो अपने ही लेखन पर अभिमान को है। और ये किसी को भी कुछ नहीं समझते। लाल साहेब में ऐसा कुछ भी नहीं लगा। स्वाभिमानी और दृढ निश्चयी लाल साहब सभी को स्नेह एवं सम्मान देने वाले सशक्त ब्यकति हैं। मुझे लगता हैं उनसे कुछ सीखा जा सकता है। कितनी तत्परता से और सहजता से वे अपने आप को साहित्य के प्रति समर्पित कर सभी के दिलो में अपना स्थान बना लेते हैं।
वे न सिर्फ लेखक ही है बल्कि समाजसेवी भी हैं। उन्होने न केवल हिन्दी साहित्य में ही बल्कि भोजपरी साहित्य में भी अपना स्थान बनाया है। टिलिबिजन हो या रेडियो, प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रोनिक मिडीया,उनकी दोनो पर ही बेहतरीन पकड है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ,साहित्य सृजन करने के साथ-साथ वे आडियो कैसेट्स के माध्यम से भोजपुरी मनोरंजन जगत में भी छाए हुए हैं।
कला, संस्कृति एवं सामाजिक चेतना मंच के लिए दृढ संकल्प रखने वाले लाल साहब की रचनाओं को जब पढता हूँ तो सहज भाव से लिखी गई उनकी रचनाएं मन में अन्दर तक बैठ जाती है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओ के ब्यूरो प्रमुख होने के साथ-साथ वह विभिन्न पुरस्कारों से लवरेज भी हैं। उनकी साहित्यिक साधना यूं ही बनी रहे यही चाहता हूँ।और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि भविष्य में भी उचाईंयों और साहित्य शिखर पर बढते रहे। उन्हें सादर प्रणाम ।
सहायक निदेशक,कृषि मंत्रालय,भारत सरकार
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