शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

एड्स का जागरुकता ही समाधान है - लाल बिहारी लाल

एड्स का जागरुकता ही समाधान है - लाल बिहारी लाल
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लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मूँह पर सफेद धब्बे,,सुखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदी परएड्स की संभावना हो सकती हैं।
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लाल बिहारी लाल

नई दिल्ली। लगभग 200-300 साल पहले इस दुनिया में मानवों में एड्स का नामोनिशान तक नही था। यह सिर्फ अफ्रीकी महादेश में पाए जाने वाले एक विशेष प्रजाति के बंदर में पाया जाता था । इसे कुदरत के अनमोल करिश्मा ही कहे कि उनके जीवन पर इसका कोई प्रभाव नही पडता था। वे सामान्य जीवन जी रहे थे।
ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले एक अफ्रीकी युवती इस बंदर से अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित की और वह एड्स का शिकार हो गई क्योकि अफ्रीका में सेक्स कुछ खुला है,फिर उसने अन्य कईयों से यौन संबंध वनायी और कईयों ने कईयों से इस तरह तरह एक चैन चला और अफ्रीका महादेश से शुरु हुआ यह एड्स की बीमारी आज पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले चुकी है। आज पूरी दुनिया में 40 मिलियन के आसपास एच.आई.बी.पाँजिटीव है इनमें से 25 मिलियन तो डिटेक्ट हो चुके हैं जिसमें सिर्फ अमेरिका में ही1मिलियन इस रोग से प्रभावित हैं। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्रसंघ की ताजा रिपोरट केअनुसार एच.आई.वी. से प्रतिदिन 6,800 लोग संक्रमित हो रहें हैं तथा कम से कम 5,700 लोग एड्स के कारण मौत को गले लगा रहे ।संयुक्त राष्ट्र संघ के ताजा आंकड़े (2017) के हिसाब से 36.9 मिलीयन ग्रसित थे जिसमें 21.7 मिलीयन एंटी रेटेरोवायरल दवाई ले रहे है औऱ 2017 में ही 1.8 मिलीयन इसके शिकार हुए है। फिर भी जागरुकता से इसके वृद्धि दर में कमी आई है।
भारत में कुछ मशहूर रेड लाइट एरियामुम्बईसोना गाछी (कोलकाता) , बनारस,चतुर्भुज स्थान (मुज्जफरपुर)मेरठ एवं सहारनपुर आदि है। उनमें कुछ साल पहले तक तो सबसे ज्यादा सेक्स वर्कर मुम्बई में इस एड्स से प्रभावित थे पर आज एड्स से सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्स कर्मी लुधियाना(पंजाब) में है और राज्यो की बात करे तो सर्वाधिक महाराष्ट्र में है। इसके बाद दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है।
    इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण (80-85प्रतिशत) असुरक्षित यौन संबंध के कारण (तरल पदार्थ के रुप में बीर्य) - ब्यभिचारियों,बेश्याओं,वेश्यागामियों एंव होमो सेक्सुअल है। इसके अलावे संक्रमित सुई के इस्तेमाल किसी अन्य के साथ करने,संक्रमित रक्त चढानेतथा बच्चों में मां के जन्म के समय 20 प्रतिशत का जोखिम और स्तनपान के समय 35 प्रतिशत का जोखिम रहता है एड्स के फैलने का। इस बिमारी के चपेट में आने पर एम्यूनी डिफेसियेंसी(रोगप्रतिरोधक क्षमता) कम हो जाती है।जिससे मानव काल के ग्रास में बहुत तेजी से बढता है। और अपने साथी को भी इस चपेट मे ले लेता है। अतः जरुरी है कि अपने साथी से यौन संबंध बनाने के समय सुरक्षक्षित होने के लिए कंडोम का प्रयोग अवश्य करें। सन 1981 में इसके खोज के बाद अभी तक30 करोड से ज्यादा लोग एड्य के कारण से काल के गाल में पूरी दुनिया में समा चुके हैं।
इसके लक्षणों में मुख्य रुप से लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया, जीभ/ मूँह पर सफेद धब्बे,,सुखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदी प्रमुख हैं।इस बीमारी को फैलने में भारत के ग्रामिण इलाके में गरीबी रेखा से नीचे,अशिक्षा,रुढीवादिता,महँगाई और बढती खाद्यानों के दामों के कारण पापी पेट के लिए इस कृत(पाप) को करने पर उतारु होना पडता है। इस सेबचने के लिए सुरक्षा कवच के रुप में कंडोम का उपयोग एवं साथी के साथ ही यौन संबंध बनायें रखना ही सर्वोत्म उपाय है ।
इसके साथ ही अपने शरीर के रोग प्रतिरोधकक्षमता बढ़ाने क लिए आयुर्वेद पध्दति अपनाना चाहिये। जिसमें गेंहू के ज्वारे,गिलोय, तुलसी के पते,बेल के फल का रस अपना के इससे लड़ा जा सकता है। इसके साथ ही साथ ही कुछ शारीरीक ब्यायाम –साइकिल चलाना,चैराकी करना, पैदल चलना,एरोबिक करने से भी इसे कम करने में मदद मिलेगी। होमियो पैथी में भी एमयुनी बढ़ाने की कई दवाये है।अमेरिका में इसके दवाई बनाने के लिए हुए कुछ परीक्षण में सफलता मिली है। बंदरो पर हुए टेस्ट में हमें कामयाबी मिली है। दुनिया में186 देशो से मिले आकडो पर आधारित एचआईवी/एड्स ग्लोबल रिर्पोट-2012 के मुताबिक भारत में 2001 से 2011 के मुकावले नए मरीजो की संख्या में 25 प्रतिशतकी कमी आई है। 40-55 प्रतिशत मरीजो को एंटीरेटेरोवायरल दवायें उपलब्ध है। लेकिन अभी भी विश्व में इसका खतरा टला नहीं है। बर्ष2011में 20.5 करोड लोग इसके चपेट मे आयें हैं। जबकि 50 प्रतिशत की कमी आई है। रिर्पोट के अनुसार 2005 से 2011 के बीच पूरी दुनिया में 24 प्रतिशत कम मौत दर्ज की गई है। यह अच्छी बात है पर अभी भी इसके लिए जागरुकता की सख्त जरुरत है। इसी क्रम में आम जन को जागरुक करने के लिए 1988 से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाते हैं। आम भाषा मे कहे तो इसके बचाव के लिए सावधानी जरुरी है जो जागरुकता से ही संभव है।
लेखक- वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार है।
फोन -7042663073

गंगा आज बाट जोहत बारी लाल के- लाल बिहारी लाल

गंगा आज बाट जोहत बारी लाल के-  लाल बिहारी लाल

सोनू गुप्ता




नई दिल्ली। कला,साहित्य आ संस्कृति के संरक्षण पर काम करे वाली संस्था संस्कार भारती के मेरठ जिला के गाजियाबाद मंडल के सैजन्य से एक दिन के  मां गंगा पर भव्य कवि समारोह के आयोजन सरस्वती विद्या मंदिर,गाजियाबाद में कइल गइल। जेमें गाजियाबाद,मेरठ ,दिल्ली गुड़गांव आ फरीदाबाद के साथे-साथे एन.सी.आर के लगभग 210 गो कवि लोग हिस्सा लेलक।  कार्यक्रम में डा. कुंवर बेचैन आ मासूम गाजियाबादी के अलावे संस्कार भारती के परनेता बाबा योगेन्द्र नाथ जी भी कवि गण के मनोबल बढ़ाने खातिर उपस्थित रहले। एह अवसर पर सब कवि गण के पांच गो ग्रुप में बांटल गइल रहे जेमें 4 गो ग्रुप हिदी के रहे आ पांचवा ग्रुप भोजपुरी के  रहे।
    भोजपुरी ग्रुप के अगुआ जे.पी. दिवेदी, अध्यक्षता सरोज त्यागी कइले उहईं अतिथि अशोक श्रीवास्तव जी रहले। कार्यक्रम की शुरुआत सामुहिक संस्कार वंदना भइला के बाद शुरु भइल। जेमें सब कवि लोग एक से बढ़के एक मां गंगा पर कविता सुनवले। भोजपुरी में राजीव उपाध्याय, अशोक पाण्डेय, अशोक श्रीवास्तव, जीतेन्द्र  नाथ तिवारी,ममता सिंह, विशाखा शुक्ला, तरुणा पुनीर, तारकेश्वर राय, डा. राजेश मांझी,राम प्रकाश ,वीणा वादिनी,संजय झा, भावना मितल,केशव मोहन पाण्डे,जे.पी. दिवेदी,पुष्पा सिंह,लाल बिहारी लाल, के साथे-साथे कई गो कवि लोग काविता के पाठ सुस्वर में कइलें। लाल बिहारी लाल  कहले कि-
 रीति रिवाज के नाम पर गंगा, मैली हो गइल बारी।
 आज बाट जोहत वारी लाल के, आके हमके संवारी।
     एह अवसर पर सब कवि गण के प्रशस्ति पत्र  अतिथि गण द्वारा देहव गइल। एमें कविता पढ़े वाला सब कवि लोग के कविता को एगो संग्रह भी निकालल जाई।






  




सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

वाल्मीकि जयंती खुशबू विकास सहयोगी समिति की ओर से मनाई गई नई


वाल्मीकि जयंती खुशबू विकास सहयोगी समिति की ओर से मनाई गई






नई दिल्ली। संस्कृत के आदी कवि महार्षि बाल्मीकि की जंयती बदरपुर में खुशबू विकास सहयोगी समिति की ओर से मनाई गई। जिसके मुख्य अतिथि बदरपुर के विधायक पं. नरायण दत शर्मा थे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रुप मे समाजसेवी एवं पत्रकार लाल बिहारी लाल ने अपने वक्तब्य मे कहा कि ज्ञान एवं कर्म के दम पर मानव महान बनता है। इसका जीता जागता उदाहरण डाकू रत्नाकर से महर्षि बने वाल्मीकि जी है। इनके पद चिन्हों पर चलना कठिन है पर नामुमकिन नहीं।  मानव कल्याण के लिए महर्षियों का जीवन अनुकरणीय है। इन्होनें संस्कृत में ऐतिहासिक ग्रंथ रमायण की रचना की जो आदि काब्य ग्रंथ है औऱ मर्यादा पुरुषोतम राम को मर्यादा पुरुष के रुप में भारत के घर घर में पहुँचा दिया। वही मुख्य अतिथि पं.नरायण दत शर्मा ने कहा कि आदमी जन्म कही भी ले पर अपने कर्म एवं हठ के दम पर महान बनता है। जो बालमीकि जी ने किया। खुशबू विकास सहयोग समिति के अध्यक्ष राकेश कोहली ने वाल्मिकि जी के बारे में बताया कि जो राम का उच्चारण भी ठीक से नही कर पाते थे वे कर्म एवं लगन से आदि कवि बन गये औऱ कालजयी ग्रंथ रमायण की रचना कर डाली। कवि के रुप में नानक चंद जी एवं गिरीराज गिरीश जी ने भी अपनी-अपनी भूमिका का निर्वाहन बा-खूबी किया और बाल्मीकि जी पर रोचक एंव मर्मस्र्पर्शी कवितायें    सुनाई।समाजसेवी एवं एम.टी.एन.एल. के सदस्य गौरव बिंदल ने भी इनके पद चिन्हों पर चलने को कहा।  वही इस क्षेत्र के कई गन्य मान्य जिनमें- भीर भान सिंह, राधे श्याम जी,भाई लाल, प्रेम कुमार, श्रीमति रेखा,आशा यादव,सुनिती आर.एम. तिवारी तथा बदरपुर  महिला पंचायत टीम के महिला सहित सैकड़ो महिलाये मौयूद थी।
 


गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

हिंदी भोजपुरी के सशक्त हस्ताक्षर –आरती आलोक वर्मा


हिंदी भोजपुरी के सशक्त हस्ताक्षर –आरती आलोक वर्मा
लाल बिहारी लाल

आरती आलोक वर्मा का जन्म  बिहार के बेतिया में एक मध्यम वर्गीय परिवार में 12 अक्टुबर 1971 को हुई पर  समाजिक सरोकार ने उन्हें साहित्यकार बना दिया।आज इनकी कर्म भूमी बिहार के ही सिवान है। कविता के बारे में इनका मानना है कि  कविता मेरी शक्ति है,इबादत है।  सीध साधे शब्दों में कहे तो  समाज से जब आहत होती है तो  संवेदनायें क्षतविक्षत होती है तो कविता उनका उपचार करती है।  यह स्वतःस्फूर्त है। उम्मीद औऱ आशा का पर्याय है। बचपन से इन्हें पढ़ने का शौक रहा है। इनकी काब्य अभिब्यक्ति बहुत ही मधुर है।इनकी आवाज कोयल-सी मीठी है। इनेक गले और दिमाग दोनों में माँ शारदे साक्षात वास करती है। इनके परिवार में कोई साहित्यकार नहीं था यूं कहे कि दूर-दूर तक कोई लेखक नहीं था  परन्तु नब्बे को दशक में  दूरदर्शन के राष्ट्रीय  चैनल पर अक्सर  होली या विषेष उत्सव के अवसर पर देर रात तक मुशायरा  और कवि सम्मेलन होता था जो इनके पिता जी  देखा करते थे। साथ-साथ ये भी देखती और सुनती थी। उसके उपरान्त  इन्होनें वैसा ही कहने  की ख्वाहिश मन में पालने लगी और उस सोंच को कलमबद्ध करने लगी औऱ धीरे- धीरे हाथ में कलम पकड़ ली।  जो आज तक जारी है।   इन्हें लिखने की प्रेरणा इनके बड़े बाई से मिलता है। इनकी ज्यादातर रचनायें महिला  एवं  समाजिक परिस्थिति  जन कुरीतियों  पर चलती है।  इनकी रचनायें   पद्य एवं गद्य दोनों में समान रुप से  देश के विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में -दैनिक हिन्दुस्तान ,दैनिक भाष्कर, हमारा मैट्रो (दिल्ली),यूग केसरी ,कनाडा ,नेपाल   के अवावे आकासवाणी ,शोसल साइट्स  ,यू ट्यूब, आखर ,भोजपुरी संगम ,हैलो भोजपुरी ,साहित्य सरिता आदि में अनवरत प्रकाशित होते रहती है।इनके  उज्जवल भविष्य की कामना वूमेन एक्सप्रेस  परिवार करता है।

लेखनी के लाल - लाल बिहारी लाल


 हिंदी और भोजपुरी  के सिपाही  - लाल बिहारी लाल
नीरज पाण्डेय

श्री लाल बिहारी लाल  का जन्म बिहार के छपरा जिला में 10 अक्टूबर 1974 को हुआ था श्री लाल  साहित्य, पत्रकारिता एवं समाज सेवा के अजब मिसाल हैं। आज जहां कुछ लोग समाज सेवा का चोला ओढ़ कर दुनिया की नज़रों  में धूल झोंकने मे लगे हैं वहीं कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जो निस्वार्थ भाव से देश और समाज की सेवा में लगे हैं। जिनका एक मात्र उद्देश्य समाज हित है। समाज के लिए कुछ करने का इनका जुनून इस हद तक बढ़ जाता है कि वह अपनी जीवका का साधन जुटाने के बजाय समाज और देश हित के प्रति समर्पित हो जाते हैं।ऐसे ही समाज सेवीकवि और लेखक लाल विहारी लाल जिन्होंने अपनी सादगी और समाज के प्रति सेवाभाव के अजब मिसाल कायम की है। इनके कई गीत विभिन्न संगीत कंपनियों से भी निकल चुके है।
   लाल बिहारी लाल समय समय पर सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहते हैं। श्री लाल समाज सेवा के अलावा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम और काव्य संगोष्ठी आयोजित कर  पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज मे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे है। वन बचाओ पेड़ लगाओ जल ही जीवन है के तहत इनका मानना है कि जल है तो कल है एवं स्वच्छ रहो स्वास्थ्य रहो आदि स्लोगन से लोगों को जागरूक करते रहते है।  विभन्न पत्र- पत्रकाओं में लेखों के माध्यम से भी स्वच्छतापर्यावरण,जल ही जीवन है  तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,नदियों की सफाई तथा जल संरक्षण आदि की झलक इनकी लेखन में देखने को मिलती है।
    लाल जी ने बदरपुर क्षेत्र मे विकास कार्यों को लेकर भी काफी संघर्ष किया है चाहे वह यातायात की समस्या हो या सड़कों पर गड्ढों की या बारिश के दिनों मे जल भराव की समस्या हो निरंतर अपनी लेखनी के माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से अधिकारियों से मिलकर लोगों की समस्यों को दूर करने मे दिन रात लगे रहते हैं। लाल बिहारी लाल जी की रचनाएं(क्रांति कविता) आज भी नालंदा विश्विद्यालय के एम.ए. के अलावा बिहार विश्व विद्यालय के बी.ए. में पढ़ाई जा रही हैं।
   44 वर्षीय लाल विहारी लाल जी स्वयं तो पिछले कई वर्षों से समाज कार्य में जुटे ही हैं साथ ही उनकी पत्नी एवं बच्चें भी इनके सामाजिक कार्यों में पूर्ण सहयोग कर रहे हैं। बदरपुर क्षेत्र में लोगों को अपने दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था जैसे राशन कार्ड आधार कार्ड या अन्य सरकारी कामों के लिए या तो लोगों को कार्यालय जाना पड़ता था या फिर स्थानीय नेताओं से मदद की गुहार लगानी पड़ती थी । इससे छुटकारा दिलाने के लिए उन्होंने बदरपुर दिग्दर्शिका तैयार की है जो 2017 के बाद 2018 में भी निकाला है।। इस दिग्दर्शिका में क्षेत्र से संबंधित अधिकतर कार्यालय व अधिकारियों के टेलीफोन नंबर व उनकी ई मेल आईडी भी उपलब्ध कराई है, जिससे लोगों को  कार्यालय के अनावश्यक चक्कर ना लगाने पड़ें और घऱ बैठे ही समस्या का समाधान हो सके।
   लाल बिहारी लाल जी द्वारा संचालित संस्था लाल कला मंच पूर्वांचल वासियों के लिए छठ पर्व पर लोक संगीत और भजन आधारित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित करती है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करके उनका मार्ग दर्शन भी करते रहते हैं। ट्रू टाइम्स  परिवार की ओऱ से लाल बिहारी लाल जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें इस  आशा के साथ कि वह इसी तरह समाज एवं साहित्य की अनवरत सेवा करते रहेगे।