रविवार, 14 मई 2017

मां, तुझे सलाम…....... -फ़िरदौस ख़ान

मांतुझे सलाम
-फ़िरदौस ख़ान
क़दमों को मां के इश्क़ ने सर पे उठा लिया
साअत सईद दोश पे फ़िरदौस आ गई...

ईश्वर ने जब कायनात की तामीर कर इंसान को ज़मीं पर बसाने का तसव्वुर किया होगा...यक़ीनन उस वक़्त मां का अक्स भी उसके ज़हन में उभर आया होगा... जिस तरह सूरज से यह कायनात रौशन है...ठीक उसी तरह मां से इंसान की ज़िन्दगी में उजाला बिखरा है...तपती-झुलसा देने वाली गर्मी में दरख़्त की शीतल छांव है मां...तो बर्फ़ीली सर्दियों में गुनगुनी धूप का अहसास है मां...एक ऐसी दुआ है मांजो अपने बच्चों को हर मुसीबत से बचाती है... मांजिसकी कोख से इंसानियत जनमी...जिसके आंचल में कायनात समा जाए...जिसकी छुअन से दुख-दर्द दूर हो जाएं...जिसके होठों पर दुआएं हों... जिसके दिल में ममता हो और आंखों में औलाद के लिए इंद्रधनुषी  सपने सजे हों...ऐसी ही होती है मां...बिल्कुल ईश्वर के प्रतिरूप जैसी...ईष्वर के बाद मां ही इंसान के सबसे क़रीब होती है...

सभी नस्लों में मां को बहुत अहमियत दी गई है. इस्लाम में मां का बहुत ऊंचा दर्जा है. क़ुरआन की सूरह अल अहक़ाफ़ में अल्लाह फ़रमाता है-"हमने मनुश्य को अपने मां-बाप के साथ अच्छा बर्ताव करने की ताक़ीद की. उसकी मां ने उसे (पेट में) तकलीफ़ के साथ उठाए रखा और उसे तकलीफ़ के साथ जन्म भी दिया। उसके गर्भ में पलने और दूध छुड़ाने में तीस माह लग गए." हज़रत मुहम्मद सलल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि "मां के क़दमों के नीचे जन्नत है." आपने एक हदीस में फ़रमाया है-"मैं वसीयत करता हूं कि इंसान को मां के बारे में कि वह उसके साथ नेक बर्ताव करे." एक हदीस के मुताबिक़ एक व्यक्ति ने हज़रत मुहम्मद साहब से सवाल किया कि- इंसानों में सबसे ज़्यादा अच्छे बर्ताव का हक़दार कौन हैइस पर आपने जवाब दिया-तुम्हारी मां. उस व्यक्ति ने दोबारा वही सवाल किया. आपने फ़रमाया-तुम्हारी मां. उस व्यक्ति ने तीसरी बार फिर वही सवाल किया. इस बार भी आपने फ़रमाया कि तुम्हारी मां. उस व्यक्ति ने चौथी बार फिर भी यही सवाल किया. आपने कहा कि तुम्हारा पिता. यानी इस्लाम में मां को पिता से तीन गुना ज़्यादा अहमियत दी गई है. इस्लाम में जन्म देने वाली मां के साथ-साथ दूध पिलाने और परवरिश करने वाली मां को भी ऊंचा दर्जा दिया गया है. इस्लाम में इबादत के साथ ही अपनी मां के साथ नेक बर्ताव करने और उसकी ख़िदमत करने का भी हुक्म दिया गया है. कहा जाता है कि जब तक मां अपने बच्चों को दूध नहीं बख़्शती तब तक उनके गुनाह भी माफ़ नहीं होते.
भारत में मां को शक्ति का रूप माना गया है. हिन्दू धर्म में देवियों को मां कहकर पुकारा जाता है. धन की देवी लक्ष्मीज्ञान की देवी सरस्वती और शक्ति की देवी दुर्गा को माना जाता है. नवरात्रों में मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विधान है. वेदों में मां को पूजनीय कहा गया है. महर्षि मनु कहते हैं-दस उपाध्यायों के बराबर एक आचार्या होता हैसौ आचार्यों के बराबर एक पिता होता है और एक हज़ार पिताओं से अधिक गौरवपूर्ण मां होती है। तैतृयोपनिशद्‌ में कहा गया है-मातृ देवो भव:. इसी तरह जब यक्ष ने युधिष्ठर से सवाल किया कि भूमि से भारी कौन है तो उन्होंने जवाब दिया कि माता गुरुतरा भूमे: यानी मां इस भूमि से भी कहीं अधिक भारी होती है. रामायण में श्रीराम कहते हैं- जननी जन्मभूमिश्च  स्वर्गादपि गरीयसी यानी जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है. बौद्ध धर्म में महात्मा बुद्ध के स्त्री रूप में देवी तारा की महिमा का गुणगान किया जाता है.

यहूदियों में भी मां को सम्मान की दृश्टि से देखा जाता है. उनकी धार्मिक मान्यता के मुताबिक़ कुल 55 पैग़म्बर हुए हैंजिनमें सात महिलाएं थीं. ईसाइयों में मां को उच्च स्थान हासिल है. इस मज़हब में यीशु की मां मदर मैरी को सर्वोपरि माना जाता है. गिरजाघरों में ईसा मसीह के अलावा मदर मैरी की प्रतिमाएं भी विराजमान रहती हैं. यूरोपीय देशों में मदरिंग संडे मनाया जाता है. दुनिया के अन्य देशों में भी मदर डे यानी मातृ दिवस मनाने की परंपरा है. भारत में मई के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है. चीन में दार्शनिक मेंग जाई की मां के जन्मदिन को मातृ दिवस के तौर पर मनाया जाता हैतो इज़राईल में हेनेरिता जोल के जन्मदिवस को मातृ दिवस के रूप में मनाकर मां के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है. हेनेरिता ने जर्मन नाज़ियों से यहूदियों की रक्षा की थी. नेपाल में वैशाख के कृष्ण पक्ष में माता तीर्थ उत्सव मनाया जाता है. अमेरिका में मई के दूसरे रविवार को मदर डे मनाया जाता है. इस दिन मदर डे के लिए संघर्ष करने वाली अन्ना जार्विस को अपनी मुहिम में कामयाबी मिली थी. इंडोनेशिया में 22 दिसंबर को मातृ दिवस मनाया जाता है. भारत में भी मदर डे पर उत्साह देखा जाता है.

मां बच्चे को नौ माह अपनी कोख में रखती है. प्रसव पीड़ा सहकर उसे इस संसार में लाती हैसारी-सारी रात जागकर उसे सुख की नींद सुलाती है. हम अनेक जनम लेकर भी मां की कृतज्ञता प्रकट नहीं कर सकते. मां की ममता असीम हैअनंत है और अपरंपार है. मां और उसके बच्चों का रिश्ता अटूट है. मां बच्चे की पहली गुरु होती है. उसकी छांव तले पलकर ही बच्चा एक ताक़तवर इंसान बनता है. हर व्यक्ति अपनी मां से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है. वो कितना ही बड़ा क्यों न हो जाएलेकिन अपनी मां के लिए वो हमेशा  उसका छोटा-सा बच्चा ही रहता है. मां अपना सर्वस्व अपने बच्चों पर न्यौछावर करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है. मां बनकर ही हर महिला ख़ुद को पूर्ण मानती है.

कहते हैं कि एक व्यक्ति बहुत तेज़ घुड़सवारी करता था. एक दिन ईश्वर ने उस व्यक्ति से कहा कि अब ध्यान से घुड़सवारी किया करो. जब उस व्यक्ति ने इसकी वजह पूछी तो ईश्वर ने कहा कि अब तुम्हारे लिए दुआ मांगने वाली तुम्हारी ज़िन्दा नहीं है. जब तक वो ज़िन्दा रही उसकी दुआएं तुम्हें बचाती रहींमगर उन दुआaओं का साया तुम्हारे सर से उठ चुका है. सचमां इस दुनिया में बच्चों के लिए ईश्वर का ही प्रतिरूप हैजिसकी दुआएं उसे हर बला से महफ़ूज़ रखती हैं. मातृ शक्ति को शत-शत नमन...     
(लेखिका स्टार न्यूज़ एजेंसी में संपादक हैं।
प्रस्तुति- लाल बिहारी लाल


सोमवार, 8 मई 2017

भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन पर परिचर्चा और पुस्तक का विमोचन

भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन पर परिचर्चा और पुस्तक का विमोचन
लाल बिहारी लाल


नई दिल्ली । जयशंकर प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित  भोजपुरी काव्य संकलन " पीपर के पतई " का लोकार्पण सह पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा द्वारा  आहूत परिचर्चा  "भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन " जो कविनगर स्थित वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन केंन्द्र मे हुआ । भोजपुरी भाषा के विकास के लिए क्या किया जा सकता है  , कैसे किया जा सकता है , इस  आंदोलन मे अब तक क्या क्या हुआ , यह आंदोलन कब शुरू हुआ और आगे इस आंदोलन को गति कैसे दी जा सकती है , इस  बात पर विचार किया गया  

      परिचर्चा मे बोलते विशिष्ट अतिथि डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव जी ने कहा कि आज भोजपुरी भाषा के पास सब कुछ है । भोजपुरी भाषा किसी बात कि मोहताज नहीं है । आज तक भोजपुरी भाषा के हर विधा पर काम हुआ है और हो भी रहा है  वही  बरिष्ठ लेखक सह अध्यक्षता कर रहे मैनेजर पाण्डेय जी ने कहा  कि कबीर बाबा भोजपुरी के आदि कवि हैं  और  हिन्दी के विकास के लिए  भोजपुरी भाषा की  बलि नहीं दी जा सकती
 
      भोजपुरी भाषा मान्यता आंदोलन के अध्यक्ष संतोष पटेल जी ने अपने तथ्यपरक उदाहरण से भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन का  दमदार पक्ष रखा  । इंद्ररा गांधी मुक्त विश्व विद्यालय से पधारे  डॉ सुशील तिवारी जी  ने भोजपुरी भाषा के गरिमामई इतिहास और इसके  शब्दों के विशाल भंडार पर प्रकाश डाला  ।  कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता के रूप मे आए भोजपुरी महासभा दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे जी ने संविधान के आठवीं अनुसूची को लेकर चल रहे प्रयासों के बारे मे विस्तार से बताया ।  

      विषय प्रवर्तन करते हुये जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी ने अपने उद्बोधन मे कहा  - "भाषा का प्रश्न हर तरफ है । भाषा केवल  अपने  अनुभव को  अभिव्यक्त करने का रास्ता भर नहीं है , भाषा पूरी मानव सभ्यता को संस्कारित करती है । आज का यह  मंच बहुत ही  समृद्ध है इसकी  समृद्धि का  कारण यह है कि  यहाँ  भोजपुरी के बारे मे  चिंतन करने वाले  हर प्रकार के मनीषी और व्यक्तित्व के लोग उपस्थित हैं । विषय को  प्रस्तुत करते हुये  मैं यही कहूँगा कि आज भोजपुरी के लिए कहीं भी निरासा कि बात नहीं है । इस समय भोजपुरी साहित्य का संवर्धन हो रहा है बहुत सारी भोजपुरी   पत्रिका - ई पत्रिका प्रकाशित हो रही हैं , ‘भोजपुरी-टाइम्सजैसे दैनिक समाचार पत्र भी निकाल रहे हैं , अनगिनत लोग लिख भी रहे हैं , किताब भी छापी जा रही हैं , लेकिन भोजपुरी मे पाठकों का बहुत अभाव है । कितने लोग हैं जो किताब खरीद कर पढ़ना चाहते हैं ? यह सबसे बड़े दुख कि  बात है ।  विद्वत समाज को इस पर भी सोचना चाहिए । पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव जी ने अपने उद्बोधन मे कहा  कि गाजियाबाद के भोजपुरी भाषा भाषी इसके संवर्धन के लिए  हमेशा से तैयार हैं और आगे भी रहेंगे हम लोग इस तरह के कार्यक्रम गाजियाबाद मे आयोजित करके जन जागरण कराते रहेंगे । मंच संचालन भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कवि मनोज भावुक जी ने किया
प्रस्तुति-लाल बिहारी लाल
फोन -07042663073

मन की गीता सहित तीन आध्यात्मिक पुस्तकों का लोकार्पण समपन्न


मन की गीता सहित तीन आध्यात्मिक पुस्तकों का लोकार्पण समपन्न






सोनू गुप्ता

नई दिल्ली।  उतराखंड चम्पावत के बयोवृद्ध लेखक महेश चंद्र सिंह अधिकारी  द्वारा रचित तीन आध्यात्मिक पुस्तकें –मन की गीता, आद्याशक्ति सहस्त्रोत्तर स्त्रोत तथा आरती एवं भजन संग्रह का लोकार्पण वरिष्ठ गजलकारा ड़ा. सीमा गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार डा. बिक्रम चोपड़ा,दिल्ली रत्न एवं वरिष्ठ साहित्यकार लाल बिहारी लाल, एक्जिम बैंक के हिंदी अधिकारी श्रीमती अर्चना मदान तथा अनुराधा प्रकाशन के संपादक मनमोहन शर्मा शरन द्वारा गांधी शाति प्रतिष्ठान ,नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर साप्ताहिक उत्कर्ष मेल के ताजा अंक का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
  इस अवसर पर अनुराधा प्रकाशन द्वारा लेखक महेश अधिकारी सहित कई समाजसेवियों जिसमें सर्व श्री रामेश्वर दयाल, अनिल शर्मा, अजस भारद्वाज तथा चारु चंद्र को सम्मानित किया गया । इस अवसर पर एक सरस कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें- सर्व श्री जसवंत सिंह तंवर,आशुतोष दिवेदी, डा. सरला सिंह, हीरेन्द्र चौधरी, लाल बिहारी लाल,डा.सीमा गुप्ता तथा डा. कृष्णानंद तिवारी आदि नें काब्यपाठ कर सभी श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्चना मदान ने की जबकि मंच संचालन प्रियंका ने।कार्यक्रम के अंत में अनुराधा प्रकाशन के संपादक मनमोहन शर्मा ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुको का हार्दिक धन्यावद किया।



शुक्रवार, 5 मई 2017

तिहार जेल में कविता की बही ब्यार

तिहार जेल में  कविता की बही ब्यार

नई दिल्ली। बज़्म सुखन और राजिंदर सिंह अरोरा 'दिलदार देहलवी की जानिबसे तिहार की सेंट्रल जेल  में एकशानदार मुशायरे का आयोजनकिया गया ! इस मुशायरेकी अध्य्क्षता जनाब राजेश चौहान सुपरिंडेंट साहेब ने की और विशिष्ट अतिथि थे जनाब कमर बदरपुरी साहेबनिज़ामतजनाब फैज़ ग़ाज़ीपुरी साहेब ने बहुतही ख़ूबसूरती से की मुशायरे में आमंत्रित शायर थे जनाब अरविन्द असर साहेब,डॉ.गुरविंदर सिंह बंगाअमरीकसिंह अदब,मोहतरमा नीना सहरजनाब . फैज़ग़ाज़ीपुरीअजय अक्स एसअली खानइरशाद सिकंदर खान,
श्रोताओं में सभी विचाराधीन कैदी थे और सब ने सभी शायरों को बहुत गौर से सुना और शेर पसंदः आने पर भरपूर दाद दीजनाब अजय अक्ससाहेब की मज़ाहियाशायरी का सभी ने भरपूर लुत्फ़ उठाया सभी के चेहरों पर मुस्कराहट नज़र आयी ! इस मौकेपर सुपरिंडेंट जनाब राजेश चौहानसाहेब का कहना था की ऐसे प्रोग्राम कैदिओं को मानसिक तनाव से रहत देने के साथ साथ कुछ सन्देश भी देते है ! कैदी कुछ वक़्त के लिएहीसही अपनी गम भूल जाते हैं
प्रस्तुति-लाल बिहारी लाल
मेल-lalkalamunch@rediffmail.com
Phon.-09868163073,7042663073

गुरुवार, 4 मई 2017

मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल के कुछ दोहे


1 मई अन्त. मजदूर दिवस पर
 
 


 लाल बिहारी लाल के कुछ दोहे


दुनिया के हर काम को,देते सदा अंजाम।
चाहे कोई कुछ कहे, लेते नहीं विराम ।1।

इनके ही सम्मान की  बाते करते लोग।
इनके नहीं नसीब में,जीवन को ले भोग।2।

कहीं तोड़े पत्थर तो, कही तोड़ते हार।
लाल तरस नही खाये,अजब गजब ब्यवहार।3)

पल-पल करते चाकरी ,रोटी खातिर रोज।
लाल जाने कब अइहें,जीवन में सुख भोग।4।

मजदूरों के जोग से दुनिया बनी महान।
चाहे बात विनाश की या हो फिर निर्माण।5।

वरिष्ठ साहित्यकार,नई दिल्ल-44
lalkalamunch@rediffmail.com


मंगलवार, 2 मई 2017

अन्त. मजदूर दिवस पर लाल कला मंच की ओऱ से काब्य निशा आयोजित

अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर लाल कला मंच की ओऱ से काब्य निशा आयोजित
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मजदूर दिवस पर लाल बिहारी लाल सम्मानित
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रवि शंकर
नई दिल्ली। अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर लाल कला मंच,नई दिल्ली  की ओऱ से एक काब्य निशा का आयोजन मीठापुर चौक पर किया गया जिसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी का. जगदीश चंद्र शर्मा तथा इस काब्य निशा की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी लोक नाथ शुक्ला ने की। इस काब्य निशा की शुरुआत लाल बिहारी लाल के सरस्वती वंदना से हुई-ऐसा माँ वर दे विद्या के संग-संग सुख समृद्धि से सबको भर दे। इस कड़ी को आगे बढ़ाया के.पी.सिंह कुंवर ने मजदूरो के स्वाभिमान की ओर इशारा करते हुए कहा कि-हाथ और हिम्तवाले  है ,लक्ष्मी पास जरुर नहीं.,जैसा चाहो हमें हाँक लो,ऐसे भी मजबूर नहीं।। इस कड़ी को आगे बढाया-मास्टर नानक चंद जी ने कहा कि- भोर रुआंसा,संध्या काली है,उनके बासन में जगह खाली है। वही मा. गिरीराज गिरीश ने कहा कि- दीन मानव आज भी पाषाण – युग में रह रहे।हैं कहां आराम इनको दुख सारे सह रहे।। वही असलम जावेद ने कहा कि अगर हम एक हो जाये मिटा के फर्क यारों । फजा जन्नत निशा हो जाये अपने इस वतन के। वही इस कडी को आगे बढ़ाया आकाश पागल ,सुरेश मिश्र अपराधी,मा. कृपा शंकर ने। अंत में लाल कला मंच के संस्थापक सचिव दिल्ली रत्न लाल बिहारी लाल ने मजदूरों की दशा एवं दिशा पर दोहा के रुप में कहा कि- पल-पल करते चाकरी ,रोटी खातिर रोज। लाल जाने कब मिलेंगे,जीवन में सुख भोग।। अंत में दणिणी दिल्ली सी.पी.आई एम के सचिव  का. जगदीश चद्र शर्मा ने को मजदूर दिवस की महता पर प्रकाश डाला। उपाध्यक्ष मलखान सैफी ने भी मजदुरों के हीत की बात कही । अध्यक्षता कर रहे लोक नाथ शुक्ला ने सभी कवियों को हार्दिक धन्यवाद दिया।
 इस अवसर पर  कार्यक्रम के अंत में  लाल बिहारी लाल को आर्य समाज  सभा ,पश्चिमी दिल्ली की ओऱ से असलम जावेद एवं अतिथियों द्वारा  पटका एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित भी किया गया।