शुक्रवार, 2 मई 2014

क्रोधी पर लोक कल्याणकारी थे भगवान परशुराम –लाल बिहारी लाल

भगवान परशुराम जयंती पर विशेष

क्रोधी पर लोक कल्याणकारी थे भगवान परशुराम –लाल बिहारी लाल

नई दिल्ली। भगवान परशुराम को उनके हठी स्वभाव, क्रोध और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए याद किया जाता है। भगवान परशुराम एक उदाहरण हैं कि क्रोध इंसान को बर्बाद कर सकती है, लेकिन अगर हम अपने क्रोध और अन्य इंद्रियों पर काबू पा लें तो हम भी उतम लोगों की श्रेणी में आ सकते हैं।  भगवान परशुराम विष्णु के छठें अवतार हैं जो वामन एवं रामचंद्र के बीच का काल है। भगवान परशुराम बैशाख शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया के पुण्य दिवस पर ही अवतरित हुए। इस दिन उनके कर्मों  का स्मरण और अनुसरण कर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की सोपान चढ सकता है। 
भगवान परशुराम क्रोधी होने के साथ साथ अत्यंत समझदार, कल्याणकारी और धर्मरक्षक भी थे। इस विषय में एक घटना बेहद लोकप्रिय है: भगवान परशुराम के पिता भृगुवंशी ऋषि जमदग्नि और माता राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका थीं। ऋषि जमदग्नि बहुत तपस्वी और ओजस्वी थे। ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पांच पुत्र रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्ववानस और राम (परशुराम) हुए। एक बार रेणुका स्नान के लिए नदी किनारे गईं। संयोग से वहीं पर राजा चित्ररथ भी स्नान करने आया था, राजा चित्ररथ सुंदर और आकर्षक था। राजा को देखकर रेणुका भी राजा के प्रति आसक्त हो गईं किन्तु ऋषि जमदग्नि ने अपने योगबल से अपनी पत्नी के इस आचरण को जान लिया। उन्होंने आवेशित होकर अपने पुत्रों को अपनी मां का सिर काटने का आदेश दिया। किन्तु परशुराम जो पितृभक्त थे,को छोड़कर सभी पुत्रों ने मां के स्नेह के कारण वध करने से इंकार कर दिया, लेकिन परशुराम ने पिता के आदेश पर अपनी मां का सिर काटकर धर से अलग कर दिया।
   क्रोधित ऋषि जमदग्नि ने आज्ञा का पालन न करने पर परशुराम को छोड़कर सभी पुत्रों को चेतनाशून्य हो जाने का श्राप दे दिया। वहीं परशुराम को खुश होकर वर मांगने को कहा। तब परशुराम ने पूर्ण बुद्धिमत्ता के साथ वर मांगा। जिसमें उन्होंने तीन वरदान मांगे पहला- अपनी माता को फिर से जीवन देने और माता को मृत्यु की पूरी घटना याद न रहने का वर मांगा। दूसरा- अपने चारों चेतनाशून्य भाइयों की चेतना फिर से लौटाने का वरदान मांगा और तीसरा वरदान स्वयं के लिए मांगा जिसके अनुसार उनकी किसी भी शत्रु से या किसी भी युद्ध में पराजय न हो और उनको लंबी आयु प्राप्त हो। इस तरह अपनी बुद्धिमता से परशुराम ने अपनी माता को भी जीवित कर लिया, पिता की आज्ञा का पालन भी किया और अपने भाइयों का भी साथ दिया।
    इस घटना के कुछ समय बाद ही एक दिन जमदग्नि ऋषि के आश्रम में कार्त्तवीर्य अर्जुन आए। जमदग्नि मुनि ने कामधेनु गौ की सहायता से कार्त्तवीर्य अर्जुन का बहुत आदर सत्कार किया। कामधेनु गौ की विशेषताएं देखकर कार्त्तवीर्य अर्जुन ने जमदग्नि से कामधेनु गौ की मांग की किन्तु जमदग्नि ने उन्हें कामधेनु गौ को देना स्वीकार नहीं किया। इस पर कार्त्तवीर्य अर्जुन ने क्रोध में आकर जमदग्नि ऋषि का वध कर दिया और कामधेनु गौ को अपने साथ ले जाने लगा किन्तु कामधेनु गौ तत्काल कार्त्तवीर्य अर्जुन के हाथ से छूट कर स्वर्ग चली गई और कार्त्तवीर्य अर्जुन को बिना कामधेनु गौ के वापस लौटना पड़ा। यह घटना जब हुई उस समय परशुराम वहां मौजूद नहीं थे। जब परशुराम वहां आए तो उनकी माता छाती पीट-पीट कर विलाप कर रही थीं।  अपने पिता के आश्रम की दुर्दशा  एवं शव पर 21 घाव देखकर और अपनी माता के दुःख भरे विलाप सुन कर परशुराम जी ने इस पृथ्वी पर से क्षत्रियों को 21 बार संहार करने की शपथ ले ली। पिता का अन्तिम संस्कार करने के पश्‍चात परशुराम ने कार्त्तवीर्य अर्जुन से युद्ध करके उसका वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से रहित कर दिया । इस पर महर्षि बालिमिकी का कहना है कि उन्होने श्रत्रविमर्दन न करते हुए बल्कि राजविर्मदन किया। और उनके रक्‍त से समन्तपंचक क्षेत्र में पांच सरोवर भर दिए। अन्त में महर्षि ऋचीक ने प्रकट होकर परशुराम को ऐसा घोर कृत्य करने से रोक दिया। उन्होंने  21 बार इस पृथ्वी का परिक्रमण किया जिसमें 108 शक्तिपीठ एवं तीर्थों की स्थापना की।

राम से परशुराम-परशुराम के बचपन का नाम राम था, उनके नाम के साथ भी एक पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है जो कुछ इस प्रकार से है- एक दिन गणेश भगवान पृथ्वी  पर भ्रमण कर रहे थे और किसी बात पर उनका राम से साथ झगड़ा हो गया। राम ने गणेश को धरती पर पटक दिया जिससे गणेश का एक दांत टूट गया और राम ने गणेश से उनका प्रिय अस्त्र परशुछीन लिया। जब यह बात भगवान शिव को पता चली तो उन्होंने राम को परशुरामका नाम दे दिया।भगवान परशुराम जी शास्त्र एवम् शस्त्र विद्या के पूर्ण ज्ञाता हैं। प्राणी मात्र का हित ही उनका सर्वोपरि लक्ष्य होता है। भगवान शिव, परशुराम जी के गुरू हैं। वह तेजस्वी, ओजस्वी, वर्चस्वी महापुरूष हैं। न्याय के पक्षधर होने के कारण भगवान परशुराम जी बाल अवस्था से ही अन्याय का निरन्तर विरोध करते रहे। उन्होंने दीन-दुखियों, शोषितों और पीड़ितों की निरंतर सहायता एवम् रक्षा की है इसलिए लोग इन्हें कल्याणकारी भगवान के रुप में भी जाना जाता है।
लेखक-लाल कला मंच के सचिव है.।
फोन-9868163073
***************************************************************

मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

मां समान पृथ्वी का रखें ख्याल-लाल बिहारी लाल

22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर विशेष 
मां समान पृथ्वी का रखें ख्याल-लाल बिहारी लाल


सबसे पहले विश्व में सितम्बर 1969 में सिएटलवाशिंगटन में एक सम्मलेन में विस्कोंसिन के अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन घोषणा की कि 1970 की वसंत में पर्यावरण पर एक राष्ट्रव्यापी जन साधारण प्रदर्शन किया जायेगा। सीनेटर नेल्सन ने पर्यावरण को एक राष्ट्रीय एजेंडा में जोड़ने के लिए पहले राष्ट्रव्यापी पर्यावरण विरोध की प्रस्तावना दी."यह एक जुआ था," वे याद करते हैं "लेकिन इसने अपना काम किया."
जानेमाने फिल्म और टेलिविज़न अभिनेता एड्डी अलबर्ट ने पृथ्वी दिवस, के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। हालांकि पर्यावरण सक्रियता का सन्दर्भ में जारी इस वार्षिक घटना के निर्माण के लिए अलबर्ट ने प्राथमिक और महत्वपूर्ण कार्य किये, जिसे उसने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल के दौरान प्रबल समर्थन दिया, लेकिन विशेष रूप से 1970 के बाद पृथ्वी दिवस को अलबर्ट के जन्मदिन22 अप्रैल, को मनाया जाने लगा। उनके इस प्रयास ने तत्कालीन सांस्कृतिक और पर्यावरण चेतना पर बहुमूल्य प्रभाव डाला।
         22 अप्रैल , 1970, पृथ्वी दिवस आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत की. के बारे में 20 लाख अमेरिकियों , एक स्वस्थ है ,  स्थायी  हिस्सा लेने के उद्देश्य से पर्यावरण. हेस और अपने पुराने कर्मचारियों को भारी तट से तट रैलियों का आयोजन किया. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों  पर्यावरण के प्रदूषण  के खिलाफ संगठित विरोध की. उस समूह  तेल रिसाव की , प्रदूषण, कारखानों और  बिजली संयंत्रों , कच्चे  मलजल , विषाक्त हार के कगार पर ,  जो कीटनाशकों ,  जिस तरह से खुला ,  जंगल को नुकसान , और  वन्यजीव   उन्मूलन  लड़ाई की, वह था  अचानक एहसास हुआ कि वे आम मूल्यों साझा कर रहे हैं . कर रहे हैं सेन नेल्सन पर पृथ्वी दिवस कहा  लोग  . "काम" के स्तर पर सहज प्रतिक्रिया का , 1970, महत्वपूर्ण कानूनों की एक संख्या के साथ पृथ्वी दिवस, कांग्रेस द्वारा पारित किए गए . सहित: -  स्वच्छ वायु अधिनियम , जंगली भूमि और  महासागर , और  संयुक्त राज्य अमेरिका पर्यावरण संरक्षण एजेंसी  के सृजन. 175 दुनिया के देशों, यह मनाया जाता है , और गैर लाभ  पृथ्वी दिवस नेटवर्क  द्वारा समन्वित है. जो पृथ्वी दिवस "दुनिया का सबसे बड़ा धर्मनिरपेक्ष छुट्टी के अनुसार , अधिक एक अरब आधे से एक वर्ष से मनाया जाता है जो ".
     सन 1990 में 200 मिलियन लोगों का 141 देशों में आगमन और विश्व स्तर पर पर्यावरण के मुद्दों को उठा कर, पृथ्वी दिवस ने  22 अप्रैल को पूरी दुनिया में पुनः चक्रीकरण के प्रयासों को उत्साहित किया और रियो डी जेनेरियो में 1992 के संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मलेन के लिए मार्ग बनाया।
   2000 में, इंटरनेट ने पूरी दुनिया के कार्यकर्ताओं को जोड़ने में पृथ्वी दिवस की मदद किया । 22 अप्रैल के आते ही, पूरी दुनिया के 5000 समूह एकजुट हो गए, और 184 देशों के सैंकडों मिलयन लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। 2007 का पृथ्वी दिवस अब तक के सबसे बड़े पृथ्वी दिवसों में से एक था, जिसमें अनुमानतः हजारों स्थानों जैसे कीव, युक्रेन; काराकास, वेनेजुएला; तुवालु; मनीला, फिलिपींस; टोगो; मैड्रिड, स्पेन, लन्दन; और न्यूयार्क के करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया
.

ग्लेशियरों के पिघल जाने पर आने वाले कुछ दशकों में पृथ्वी के अस्तित्व के समक्ष खतरा पैदा होने जैसी बातों को महज अटकलबाजीकरार देते हुए भारत के शीर्ष हिम वैज्ञानिक रैना ने कहा है कि हिमालय के जिन ग्लेशियरों के पिघलने की बात उठ रही है, उनमें से महज दो से तीन हजार को ही भूमंडलीय तापमान में वृद्धि के चलते खतरा हो सकता है।आईपीसीसी की चौथी आकलन रिपोर्ट में हिमालयी ग्लेशियरों के 2035 तक पूरी तरह पिघलने के अनुमान को गलत साबित करती पर्यावरण और वन मंत्रालय की रिपोर्ट को पिछले वर्ष तैयार चुके भारतीय भूविज्ञान सर्वेक्षण के पूर्व उप निदेशक रैना ने कहा कि यह कहना सरासर गलत है कि आने वाले दशकों में सारे ग्लेशियरों के पिघल जाने के बाद पृथ्वी ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी 4.5 सौ करोड़ वर्ष पुरानी है और चंद दशकों में उसके अस्तित्व को खतरा नहीं हो सकता। हालाँकि, तापमान को ग्लेशियर ही प्रभावित करते हैं और कार्बन उत्सर्जन की बेहद गंभीर समस्या के चलते उन्हें नुकसान भी पहुँच रहा है। रैना ने कहा कि हिमालय के भारतीय क्षेत्र में करीब 9,575 ग्लेशियर हैं। इनमें अगर खतरा होगा तो सिर्फ दो से तीन हजार ग्लेशियरों को होगा। गौरतलब है कि आईपीसीसी की रिपोर्ट के दावे के प्रत्युत्तर के रूप में आई पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि हिमालय ग्लेशियर पिघल रहे हैं लेकिन उनके पिघलने की रफ्तार ऐसी नहीं है कि 2035 तक वे पूरी तरह विलुप्त होकर पृथ्वी के अस्तित्व के समक्ष खतरा
पैदा कर देंगे।
      ग्रीन हाउस गैस  के प्रभाव को कम करने के लिए दिसंबर 1997 में क्योटो पोटोकाँल लाया गया । जिसमें विश्व के 160 देशों ने यह स्वीकार किया कि ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी लाई जायेगी परन्तु भारत,चीन सहित कुछ देशों ने ही पहल किया जबकि कूल ग्रीन हाउस गैस का 80 प्रतिशत से ज्यादा उत्सर्जक अमेरिका आज भी इससे बचते आ रहा है।
 ग्रीन हाउस गैस पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर.सरकारी संगठन टॉक्सिक लिंक्सके रवि अग्रवाल कहते हैं, 'अगर हमें पृथ्वी को बचाना है तो हमें कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर ध्यान केंद्रित करना होगा।'  विकसित देशों को व्यापक कार्बन कटौती के लिये राजी नहीं किया गया तो पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में होगा। अग्रवाल ने कहा कि पृथ्वी को बचाना है तो सरकारों को उद्योग जगत को साथ लेकर चलना होगा क्योंकि उन्हीं के चलते कार्बन उत्सर्जन और अन्य तरह के प्रदूषण में इजाफा हुआ है।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिये कार्य योजना जरूर तैयार की है लेकिन इस योजना को सही मायनों में लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा।
  
पृथ्वी की रक्षा करने के कुछ सरल उपाय-
1.   बाजार जाते समय घर से कपडे,जूट का थैला या बास्केट लेते जायें।
2.   प्लास्टिक के उपयोग किये हुए थैले को पुनः उपयोग करे ।
3.   अलग-अलग समान के बजाये एक ही प्लासटिक थैली में अनेक समान एक साथ रखें .
4.   घर पर कम से कम प्लास्टिक थैले का उपयोग करें।
5.   पर्यावरण के प्रति स्वंय जागरुक रहे और औरों को भी जागरुक बनायें।
6.   बच्चों को प्रोत्साहित करें पर्यावरण के प्रति और प्लास्टिक से हेने वाले नुकसान को समझायें। 
7.   ताकि कल वो इसे समझ सकें।
8.   पानी की बर्बादी रोके।
9.   बच्चों के पुराने खिलौने कबाडी को न बेंचे बल्कि अपने से छोटे बच्चों को गिफ्ट में दे दें।
1. इसके अलावें कई ऐसे प्रयास है जिसके तहत पृथ्वी को होनेवाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

लेखक –लाल बिहारी लाल, 
पर्यावरण प्रेमी ,सचिव-लाल कला मंच,नई दिल्ली

पीएच. 09868163073

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

उदयोग भवन के करीब पार्क में फूलों एवं मौसम का आनंद लेते हुए -लाल बिहारी लालएवं राज कुमार उग्रवाल

समाजसेवी एवं लेखक लाल बिहारी लाल संग में हैं दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्र हमारा मैट्रो के मुख्य संपादक राजकुमार अग्रवाल उदयोग भवन के करीब पार्क में फूलों एवं मौसम का आनंद लेते हुए।















गुरुवार, 27 मार्च 2014

बदरपुर में शहीदी दिवस मनाया

बदरपुर में शहीदी दिवस मनाया
सोनू गुप्ता
बदरपुर। दक्षिणी  दिल्ली सी.पी.आई(एम.) कमेटी द्वारा कामरेड जगदीश चंद्र की अगुआई में मीठापुर के लखपत कालोनी  मे शहीदी दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी  का आयोजन  किया गया । जिसका विषय था- भगत सिंह तथा उनके साथियो के विचार आज भी  प्रासांगिक है। इसका जिसका संचालन काम. शर्मा ने किया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई समाजसेवी एवं गन्यमान्य ब्यक्तियो ने शहीदों पर अपने-अपने बिस्तार से विचार  रखे। जिसमें-तुलसी राम आर्य प्रो.सिद्देश्वर शुक्ला ने कहा कि भगत सिंह के शहीद होने का औचित्य आज भी बाजारीकरण के दौड में पूरा नहीं हो पा रहा है। वही प्रो. हवलदार शास्त्री ने कहा कि आज भी हम वही के वही खडे है,जहां उस समय थे। अनिल शर्मा ने भी इसकी उपयोगिता पर बल दिया। का. जगदीश चंद्र शर्मा ने कहा कि भगत सिंह तीन बातों पर जोर देते थे –सामप्रदायिकता,समप्रभुता तथा समाजवाद। इन्ही को दुरुस्त करने के लिए वे शहीद हो गये ताकि समाज को सही संदेश दे सके। इस गोष्ठी में कुछ कवियो- डा. सत्य प्रकाश पाठक,श्रीपाल,सुरेश मिश्र अपराधी ने भी अपनी वीर रस की कविताओ से श्रोताओं को सराबोर किया।
      इस गोष्ठी में समाजसेवी लाल बिहारी लाल ने कहा कि भगत सिंह मानसिक रुप से हिंसक नही थे परन्तु वक्त के नजाकत को ध्यान में रखकर  17 दिसंबर 1928 को लाहौर में इनके सहयोगियो तथा 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की एसेम्बली में बम फेका था और अपने सहयोगी बटूकेशवर दत्त संग स्वंय को गिरफ्तार भी करवाया था सिर्फ अंग्रेजी हुकुमत को नींद से जगाने के लिए न कि जनहानी के लिए। क्योकि आजादी की लडाई में नरमपंथी नेताओं ने अहिंसा का सहारा ले रखा था । भगत सिह की सहादत रंग लायी और देश 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। अशके अलावे अंगदराज शर्मा,लाखन सिंह,मलखान सैफी,ललित शर्मा,आत्माराम पांताल, के.पी.सिंह ,डी.एन.सिंह आदी ने अपने-अपने विचार रखे।
   आज आजादी के बाद उनकी त्याग तपस्या को मोल कम हो गया पहले अंग्रेजो (गोरों)की हुकुमत थी अब कालो (भारतीयो )की हो गई है । इसका वे विरोध तब भी करते थे।  आज जब तक जन-जन में देश की भावना नहीं जगेगी जब तक उनकी शहादत बेकार है। आज राष्ट्रर्हित सर्वोपरी हो ऐसा प्रावधान हो तभी सही मायने में उनकों सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
फोटो-3501+5312




बुधवार, 19 मार्च 2014

होली पर गोविन्दम में बरसा भाईचारे का रंग-अबीर गुलाल सोनू गुप्ता


होली पर गोविन्दम में बरसा भाईचारे का रंग-अबीर गुलाल

सोनू गुप्ता
बदरपुर। सामाजिक भाईचारे का पावन पर्व होली के शुभ अवसर पर बदरपुर के मोलडबंद में गोबिन्दम ट्रस्ट के संस्थापक गोविन्द राम आवाना के कार्यालय गोविन्दम पर एक भब्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के अनेक समाजसेवी ,बुद्धिजीवी एवं गन्यमान्य  शामिल हुये । इस अवसर पर होली के पारंपरिक  गीतो-रंग बरसे भींजे चुनरवाली रंग बरसे.......सोने की थाली में जेवना पडोसे खाये गोरी का यार बलम तरसे रंग बरसे....सहित अनेक गीतों पर बज रहे डी.जे. का  आनंद  उपस्थित आगन्तुकों ने युवाओं संग उठाया और एक दुसरे को रंग-अबीर, गुलाल  लगाया और गले मिलकर  सामाजिक भाईचारे के पावन पर्व  होली को होली की तरह मनाया। गोविनंद राम आवाना ने सभी आगन्तुकों का स्वागत रंग-अबीर लगाकर किया।
   इस अवसर पर समाजसेवी,बुद्धिजीवी-उनमें जीतेन्द्र बशिष्ठ,रिंकू शर्मा, राम भदौरिया, आतममाराम पांचाल,संजय बिहारी, उदय मिश्रा, सुखी प्रधान, खुशीराम आवाना, लाल मिश्रा , संजय मिश्रा, सुरज आवाना, कृष्ण आवाना,मिन्टू शर्मा अमर आवाना, जगबीर कश्यप, फौजूला अंसारी सहित पत्रकारों में नीतिश चौधरी भरत त्यागी, मनोज सिंह एवं लाल बिहारी लाल आदी सहित सैकडो गन्य मान्य मौयूद थे अंत में गोविन्द राम आवाना ने आये हुए सभी मेहमाने को धन्यवाद दिया और समाज में फैले भ्रष्टाचार रुपी दानव को भगाने का निवेदन भी किया ताकि इस समाज को होली (पवित्र) बनाया जा सके।
 इसके साथ ही लेखक एवं समाजसेवीलाल बिहारी लाल  
होली के शुभ अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न समाजसेवियो के साथ  






  लाल बिहारी लाल समाजसेवी  चाचा चौकन के साथ
 लाल बिहारी लाल समाजसेवी गोविन्द  राम आवाना के साथ
 लाल बिहारी लाल समाजसेवी  जगदीश चंद्गोर शर्विमा के साथ
  लाल बिहारी लाल समाजसेवी उमेश चंद्र के साथ
  लाल बिहारी लाल समाजसेवी गोविन्द  राम आवाना  एवं जीतेन्द्र बशिष्ट  के साथ
 लाल बिहारी लाल समाजसेवी गोविन्द  राम आवाना ,भरत त्यागी रिंकू शर्मा एवं अन्य के  साथ

मंगलवार, 18 मार्च 2014

Fraternal drop in Holi colors Govindam - Abir Gulal

Badarpur. Social fraternity on the occasion of the holy festival of Holi in Badarpur Moldband Govind Ram Awana Gobindm founder of the trust office Bby Holi Milan function was organized at Govindam. The region's many social, intellectual and Gnyamany are included. On the occasion of Holi, the Traditional Geeto - BINJE Chunrwali eaten in Pdose Xavna Color Color Gold Plate ....... Balam Crave rain lashed the love of white paint .... lashed several songs, including A DJ playing The room with the youth took the audience present and look at each other - Abir, Gulal put together and embrace social solidarity auspicious occasion of Holi Holi celebrated like. All visitors welcome Ram Awana Govinand the color - made ​​by Abir.
   On this occasion, social, intellectual - Jitendra them Basistha, Rinku Sharma, Ram Bhadoria, Atmmaram Panchal, Sanjay Bihari, Uday Mishra, happy-intensive, Khushi Ram Awana, red Mishra, Sanjay Mishra, Sunbeam Awana, Krishna Awana, Awana immortal Mintu Sharma, Jai Kashyap, Bharat Choudhary Fujula Ansari Nitish Tyagi, including journalists, including Manoj Singh and Lal Bihari Lal used by hundreds Gny valid Muud finally Govind Ram Awana Guests wishing thanked everyone who came and requested to drive the demon rupee corruption in society so the society Holly (Holy) can be made.
Presentation - Lal Bihari Lal
Phone -9,868,163,073





मंगलवार, 11 मार्च 2014

बदरपुर में होली पर कवियो की चौपाल ने बिखेडा गुलाल

बदरपुर में होली पर कवियो की चौपाल ने बिखेडा  गुलाल
         लाल कला मंच ने मनाया होली पर रंग अबीर उत्सव  

नई दिल्लीःलाल कला,सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच(रजि.) द्वारा सामाजिक भाईचारे का पावन पर्व होली के शुभ अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक सरस काव्य गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मिला जुला रुप  रंग अबीर उत्सव-2014(काव्य गोष्टी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम) का आयोजन अल्फा शैक्षणिक संस्थान,मीठापुर के प्रांगण में वरिष्ठ सामाजसेवी डा. के.के. तिवारी की  अध्यक्षता में समपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की शुरुआत अतिथि कामरेड जगदीश चंद्र शर्मा ने दीप जलाकर किया। इसके बाद लाल बिहारी लाल के सरस्वती वंदना-ऐसा माँ वर दे/विद्या के संग-संग/सुख समृद्धि से सबको भर दे, से शुरु हुआ। कार्यक्रम के अतिथि के रुप में कामरेड जगदीश चंद्र शर्मा, समाजवादी आत्मा राम पांचाल,गिरीश मिश्रा तथा हैलो भोजपुरी नेट एवं प्रिंट मैगजीन के संपादक राजकुमार अनुरागी थे। इस कार्यक्रम का संयोजन दिल्ली रत्न श्री लाल बिहारी लाल का था तथा संचालन वरिष्ठ साहित्यकार शिव प्रभाकर ओझा ने किया। इस अवसर दिल्ली से त्रिविध भाषाओं(हिन्दी,भोजपुरी एवं अंग्रैजी) में प्रकाशित हैलो भोजपुरी मासिक पत्रिका के मार्च 2014 (होली विशेषांक) अंक का अतिथियो द्वारा लोकार्पण भी किया गया। संस्था द्वारा अतिथियों को विभिन्न पत्रिकाओं द्वारा सम्मानित किया गया।
       इस कार्यक्रम में स्थानीय विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं दर्जनों कवियों ने भी इस समारोह मे भाग लिया जिसमें-राकेश महतों, रवि शंकर, कृपा शंकर,के.पी. सिंह,दिवाकर मिश्रा, लाल बिहारी लाल ने कहा-
              होली होली की तरह मिल के मनायें संग।
              जतन करें मिज जूल के बिखरे खुशी के रंग।।
इसके अलावें ,डा. आर .पी. सिंह,राजेश कुमार,रमाकांत दास,भवानी शंकर शुक्ला,मा. गिरीराज शर्मा,जय प्रकाश गौतम,महेन्द्र प्रीतम,आकाश पागल,सुर्श मिश्र फरियादीविजय कुमार,गौरव बिन्दल, मुरारी कुमार,मनोज सिंह,मलखान सैफी ,पी,एस.भारती,उमेश चंद्र  सहित अनेक गन्य-मान्य ब्यक्ति मैयूद थे। अन्त में संस्था के अध्यक्ष श्रीमती सोनू गुप्ता ने  कवियो, अतिथियों एवं विभिन्न स्कूल से आये हुए बच्चों सहित शिक्षको को धन्यवाद दिया।  

     प्रस्तुति
 लाल बिहारी गुप्ता लाल, 
 सचिव लाल कला मंच
फोन-9868163073