मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

लाल बिहारी लाल भारत गौरव रत्न सम्मान से सम्मानित


 

लाल बिहारी लाल भारत गौरव रत्न सम्मान से सम्मानित

सोनू गुप्ता


 नई दिल्ली । नई दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा मैट्रो के साहित्य संपादक एवं साहित्य टी.वी के संपादक लाल बिहारी लाल को  पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं सामाजिक सरोकार के  लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण समेत विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाली लोकप्रिय संस्था अरुणाभा वेलफेयर सोसाइटी, फरीदाबाद द्वारा " भारत गौरव रत्न सम्मान " से संस्था के अध्यक्षा प्रणीता प्रभात,  अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज गगन शर्मा, कोरियोग्राफर अबरार आशु अहमद  तथा संगीतज्ञ गोपाल शर्मा  द्वारा सम्मानित किया गया । इन्हें सम्मान में  अंग वस्त्र,पदक एवं  सम्मान- पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से दर्जनों साहित्यकारों,पत्रकारों ,समाजसोवियों एवं कलाकारों को अतिथियों द्वारा सम्मानिकत किया गया।

           श्री लाल को देश की कई सरकारी एवं गैर सरकारी  संस्थाओं द्वारा अभी तक लेखन,साहित्य, पत्रकारिता ,पर्यावरण एवं  सामाजिक क्षेत्रों  में सराहनीय कार्यो के लिए 100 से ज्यादा  पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनकी कविता क्रांति बिहार विश्वविद्यालय के स्नातक एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर में पढ़ाई जाती है । इनके सैकड़ों गीत प्रमुख संगीत कंपनियो के माध्यम से विभिन्न गायक एवं गायिकाओं के स्वर में बाजार में उपलब्ध है ।  श्री लाल की कविता एवं आलेख देश के विभिन्न समाचार पत्रों एवं साहित्यिक पत्र –पत्रिकाओं में अनवरत प्रकाशित होते रहते हैं। श्री लाल साहित्य टी. वी.एवं हमारा मैट्रो के माध्यम से  साहित्य सेवा में काफी सक्रिय हैं। दोनो के माध्यम से सहित्य लेखको को सुगम मंच प्रदान करते है।  

 

बुधवार, 22 मई 2024

सी.पी.सी.बी. कर्मचारी कल्याण संघ के स्थापना दिवस पर पहुंचे लाल बिहारी लाल

 

सी.पी.सी.बी. कर्मचारी कल्याण संघ नें मनाया अपना 39 वाँ स्थापना दिवस
-
सोनू गुप्ता





नई दिल्ली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB के कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा अपना 39 वां स्थापना दिवस CPCB के प्रशिक्षण कक्ष में मनाया गया। कर्मचारी कल्याण संघ के महासचिव श्री के॰पी॰ राठी एवं श्री बीरेन्द्र सिंह, संयुक्त सचिव द्वारा यूनियन के स्थापना दिवस पर कार्यालय में मजबूत यूनियन की महत्ता को रेखांकित करते हुये कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।
कार्यक्रम में यूनियन की स्थापना से लेकर आज तक किये गये विभिन्न कल्याण कार्यों पर च्रर्चा हुई। इस संस्था के सभी कर्मचारी पेंशन के लिए काफी लंबे समय से संघर्षरत है। यूनियन के सभी सदस्यों द्वारा पेंशन मिलने तक यह लड़ाई जारी रखने एवं सी.पी.सी.बी. में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को योजनबद्ध तरीके से स्थायी कराने का संकल्प दोहराया। इस समारोह के मुख्य अतिथि यूनियन के संस्थापक सदस्य प्रताप सिंह शाही , यूनियन के भूतपूर्व महासचिव नरदेव सिंह तथा यूनियन के पूर्व अध्यक्ष विपिन कुमार गोयल ने कहा कि हम कर्मचारियों के हितो के लिए हर समय तत्पर है। वहीं NFCGA-EWO के अध्यक्ष घनश्याम चौहान, पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के यूनियन के पदाधिकारी ओमवीर सिंह भाटी ने भी इस संस्था को हर संभव सहयोग करने कl आश्वासन दिया।
संघ के पूर्व पदाधिकारियों प्रताप सिंह शाही, नरदेव सिंह, विपिन कुमार गोयल, घनश्याम चौहान, ओमवीर सिंह भाटी, एवं कर्मचारी कल्याण संघ के मीडिया प्रभारी लाल बिहारी लाल का सीपीसीबी यूनियन के कामरेड साथियों विनोद कुमार (अध्यक्ष), के॰पी॰ राठी (महासचिव), बीरेन्द्र सिंह (संयुक्त सचिव), जी.एम. खान (संगठन सचिव), सतीश कुमार, कार्यालय सचिव, रविंद्र कुमार कोषाध्यक्ष, सुभाष चंद उप-कोषाध्यक्ष, महेश, ब्रिजेश, मुकेश कुमार एवं श्रीमति अंजु भारद्वाज कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा इन सभी को मोमेंटो देकर स्वागत किया गया। इस प्रोग्राम की एंकरिंग सी.पी.सी.बी. के राजभाषा प्रभाग में कार्यरत श्रीमती पारूल राठी द्वारा की गई। अंत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने सभी आगन्तुकों को हार्दिक धन्यवाद दिया। 

Top of Form

 

रविवार, 5 मई 2024

दिल्ली की फ़िरदौस ख़ान को मिला बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड

 

दिल्ली की फ़िरदौस ख़ान को मिला बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड  

 


-लाल बिहारी लाल

 

नई  दिल्ली। जल संरक्षण के लिए समर्पित मुम्बई की विश्व विख्यात संस्था ड्रॉप डेड फ़ाउंडेशनने फ़िरदौस ख़ान को उनके पानी बचाने के लिए किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया है। संस्था ने उन्हें साल 2023-2024 के बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड से नवाज़ा है।

       ग़ौरतलब है कि सुप्रसिद्ध साहित्यकारचित्रकारकार्टूनिस्ट और पर्यावरणविद आबिद सुरती ने साल 2007 में मुम्बई में ड्रॉप डेड फ़ाउंडेशन की शुरुआत की थी। इसकी टैगलाइन है- सेव एवरी ड्रॉप ऑर ड्रॉप डेड। इसका मक़सद जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस मुहिम को देश ही नहींबल्कि दुनियाभर में सराहा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र भी इसे तवज्जो दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोल्हेम ने भी कई बार इसकी तारीफ़ की है।

       मार्च 2008 में फ़िल्म निर्माता शेखर कपूर जल संरक्षण पर फ़िल्म बना रहे थे। उन्होंने अपनी वेबसाइट पर इस मुहिम की ख़ूब तारीफ़ की थी। सुप्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने भी इसे सराहा है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी जल संरक्षण की इस मुहिम की सराहना करते हुए इसकी टीम को मुबारकबाद दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुहिम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इस पर वाटर वारियरनामक फ़िल्म बनवाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इससे बहुत मुतासिर हैं। उन्होंने आबिद सुरती साहब को दिल्ली बुलाया और उनके वॉटर मॉडल को अपने राज्य में लागू करने का फ़ैसला किया। देश की राजधानी दिल्ली भी जल संकट से जूझ रही है।

     फ़िरदौस ख़ान कहती हैं कि ज़मीन का दो तिहाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ हैलेकिन इसमें से पीने लायक़ पानी बहुत कम यानी सिर्फ़ ढाई फ़ीसद है। इस पानी का भी दो तिहाई हिस्सा बर्फ़ के रूप में है। दुनियाभर में जितना पानी हैउसका महज़ 0.08 फ़ीसद हिस्सा ही इंसानों के लिए मुहैया है। इंसानों की ख़ामियों की वजह से ये पानी भी लगातार दूषित होता जा रहा है। कारख़ानों और नालों की गंदगी नदियों के पानी को ज़हरीला बना रही है। पहाड़ों में मुसलसल खनन होने और जंगलों को काटने की वजह से बारिश पर असर पड़ रहा है। जब हम पानी पैदा नहीं कर सकतेतो फिर हमें इसे बर्बाद करने का क्या हक़ है?  वे कहती हैं कि जो रब से मुहब्बत करता है, वह उसकी क़ुदरत के ज़र्रे-ज़र्रे से भी मुहब्बत करता है। और जिस चीज़ से मुहब्बत की जाती हैतो उसकी हिफ़ाज़त करना भी लाज़िमी हो जाता है। वैसे भी पानी की हर बूंद अनमोल है। पानी के बिना ज़िन्दगी का तसव्वुर भी नहीं किया जा सकता। हर जानदार चीज़ को पानी की ज़रूरत होती है। इसलिए पानी को फ़िज़ूल न बहायेंक्योंकि इससे कितने ही लोगों के गले तर हो सकते हैं।  वे बताती हैं कि हमारे देश की ज़्यादातर आबादी धार्मिक है। इसलिए जल संरक्षण का संदेश देने के लिए विभिन्न धर्मों के पोस्टर बनवाए गये हैं। हर धार्मिक स्थल पर रोज़ाना सैकड़ों से लेकर हज़ारों लोग आते हैं। वे इन संदेशों को बार-बार देखेंगे, तो इस पर विचार करेंगे और पानी बचाने पर ध्यान देंगे। मुम्बई के बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर भी जल संरक्षण का संदेश छपे पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इस मुहिम को भरपूर जनसमर्थन मिल रहा है। आबिद सुरती साहब चाहते हैं कि ये मुहिम दुनिया के हर कोने तक पहुंचे। वे लोगों से अपील करती हैं कि वे इस मुहिम में बढ़ चढ़कर शिरकत करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से न जूझना पड़े।         

मंगलवार, 7 मार्च 2023

 विश्व पुस्तक मेला में लाल बिहारी लाल की पुस्तक संग्रह महंगी रोटी हुई लोकार्पित


सोनू गुप्ता



नई दिल्ली। दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में नवजागरण प्रकाशन के स्टाँल पर कवि,लेखक एवं गीतकार सह साहित्य टी.वी. के संपादक लाल बिहारी लाल की लिखी हुई आजादी के अमृत महोत्सव पर 75 कविताओं का संग्रह महंगी रोटी का लोकार्पण- अंबेडकर फाउंडेशन के एडिटर सुधीर हिल्सयान, जामिया विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डा. राजेश मांझी,लोक सभा सचिवालय के एडिटर रण विजय राव,लेखक लाल बिहारी लाल,प्रकाशक राजकुमार अनुरागी,लेखिका प्रेम लता मुरार,मुम्बई से पधारे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार हरिश पाठक,लेखिका डा. संदेश रायपुरकार तथा लेखक अनिल मासूम ने किया।

  लाल बिहारी लाल पिछले दो दशक से साहित्य सेवा में सक्रिय है। उन्होंने 5 सहयोगी संकलन संपादित कर चुके है तथा 2017 से 2022 तक लगातार बदरपुर डायरेक्ट्री का भी संपादन किया है। वर्तमान में साहित्य टी.वी. के माध्यम से साहित्य सेवा में लगे हुए हैं।इनकी कवितायें,गीत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते रहती है।इनके लिखे सैकड़ों गीत विभिन्न संगीत कंपनियों से बाजार में उपलब्ध है। हाल ही में संगीता वर्मा की आवाज में होली गीत आया है।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

लाल बिहारी लाल विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित

 लाल बिहारी लाल  विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित




 

सोनू गुप्ता
 
++++देश के विभिन्न प्रांतो से 51 हिंदी सेवी सम्मानित++
 
 
 
नई दिल्ली। हिंदी की सेवा में दशकों से लगी देश की जानी मानी  संस्था जैमिनी अकादमी ,पानीपत द्वारा  विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से दिल्ली के लाल बिहारी लाल सहित  51 हिंदी के वरिष्ठ विभूतियों को डिजीटल रुप  हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है। संस्था के अध्यक्ष ड़ा. विजेन्द्र जैमिनी ने बताया कि आजकल करोना काल में फिजीकल के बजाये डिजीटल सम्मान दिया गया है।
    लाल बिहारी लाल पिछले दो दशक से हिदी सेवी के रुप में काफी योगदान दिया है। पत्रकार एंव गीतकार लाल बिहारी लाल को देश की कई संस्थाये विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित कर चुकी है। उनमें पर्य़ावरण प्रहरी,शब्द साधक, राष्ट्र गौरव, दिल्ली रत्न, राष्ट्रभाषा संरक्षक आदि ।  इनके गीतों को  मानविता मिडिया, टी. सारीज, रामा, मैक,मैक्स, यू.की., लाचो,सुरताल भारत महान म्यूजिक,प्रज्ञा म्यूजिक सहित देश के सभी संगीत कंपनियों के लिए सकड़ो गीत लिख चुके है। इनके दर्जनों गीत हिंदी और भोजपुरी में यू. ट्यूब पर भी विभिन्न गायक ,गायिकाओं के स्वर में उपलब्ध है। इनके कई गीत बहुत जल्द आने वाले हैं। इनकी कविता क्रान्ति बिहार के दो विश्वविद्यालयों में पढ़ायी जाती है।

 
 

शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

दीपावाली पर खुशियाँ ग्रीन पटाखों से ही मनायें और जीवन बचायें

 दीपावाली पर खुशियाँ ग्रीन पटाखों से ही  मनायें  और जीवन बचायें

 
लाल बिहारी लाल
 
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++
साधारण पटाखों से निकलने वाली गैसों में सल्फर डाई आंक्साइड-जिससे ,गले एवं छाती में संक्रमण, श्वसन में परेशानी,कारबन मोनो आक्साइड –खाँसी, त्वचा में परेशानी, उच्च रक्त चाप, मानसिक एवं हृदय की बिमारियाँ उतपन्न, पोटेशियम नाइट्रेट जो  कैंसर के मुख्य वजह है. हाइड्रोजन सल्फाइड जो  छाती में दिक्कत, ब्रोमियम आक्साइट  आँखों की त्वचा  तथा गंध सूघने की क्षमता का नष्ट कर देता है। इसेक साथ ही उच्च शोर से मानव क कान को पर्दे भी फट सकते है।
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++



 
नई दिल्ली। भगवान राम चंद्र कई दुर्दांत राक्षसों का वध कर वनवास से अयोध्या वापस  आये तो इसी खुशियों को मनाने के लिए पूरी अयोध्या को दीपों से सजाया गया था जो कलांतर में दीपावली का रुप ले लिया। पर धीरे-धीरे  खुशियाँ मनाने का तरीका बदल गया और आज हर मौसम या हर खुशी में पटाखों  को सुमार कर लिया गया है। बढ़ती हुई आबादी और घटते हुए वन ने पर्यावरण पर काफी दबाब बढ़ा दिया  है, ऐसे में इस मौसम में अन्य मौसम की तुलना में हवायें काफी प्रदूषित होती है उपर से पटाखो का शोर और धुआं जीवों के लिए काफी हानिकारक साबित हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर कई पर्यावरण संस्थानों के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2017 को देश में दीपावाली पर ग्रीन पटाखे को जलाने के लिए इजाजत दी थी यानी साधारण पटाखों पर बैन लगा दिया गया साथ ही साथ जलाने के समय सीमा भी रात्री में 8 बजे से 10 बजे निर्धारित कर दी औऱ यही प्रावधान वर्ष  2018,2019 भें भी लागू रहा । वर्ष 2020 मे करोना के कारण कुछ मौसम परिस्थितियाँ अनुकुल नही था पर पर्यावरण में काफी सुधार हुआ। वर्ष 2021 मे धीरे –धीरे सभी क्रिया कलाप पटरी पर लौट आई । वर्ष 2021 में दीपावली पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे ही जलाने की इजाजत दी है और  अधिकारियों पर जिम्मेदारी भी तय कर दी है।
  इस वर्ष संस्कृति की दुहाई देकर माननीय सांसद मनोज तिवारी छूट के लिए सुप्रीम कोर्ट गये थे पर छूट नहीं मिली।माननीय जज एम आऱ शाह की बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि कि आप भी दिल्ली और एन.सी.आर में रह कर इस तरह की बात कर रहे है। इन्होने ये भी कहा कि दिल्ली एन.सी.आर में दीवाली पर पटाखों पर बैन रहेगी 2 जनवरी 2023 तक वही देश के अन्य हिस्सों में पहले की तरह जारी रहेगा यानी ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत रहेगी। यह एक सकारात्मक पहल  है पर यह तभी संभव है जब जनता जागरुक हो और सरकार का हाथ बटाये वरना पटाखों के इस जलन से जीव संकट में आ जायेंगे। ।

  बात करते है ग्रीन पटाखों की तो दुनिया में चीन को बाद भारत दूसरे पायदान पर निर्माता(उत्पादक) के रुप में जाना जाता है। पटाखो के घटक में से अल्युमुनियम, बेरियम  पोटेशियम नाइट्रेट तथा कार्बन की मात्रा कम या बिल्कुल नगन्य कर दी जाती है तो यही पटाखे ग्रीन पटाखे कहलाती है। इन पटाखों से  वातावरण में 30-40% गैसे कम उत्यर्जित होती है जिससें वाताररण में 30-40 प्रतिशत  प्रदूषण कम फैलते हैं। इन पटाखो का निर्माण राष्ट्रीय पर्यावरण अभियंत्रिकी संस्थान (NEERI/निरी),पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संस्थान(PESO/पेसो) के सहयोग से सी.एस. आई. आऱ. ने बनाया है। इन्हीं के फर्मूला का उपयोग अन्य पटाखा उत्पादक कंपनिया करती है जिन पर इको/ग्रीन पटाखे का लोगो होता है। साधारण पटाखों से निकलने वाली गैसों में सल्फर डाई आंक्साइड-जिससे ,गले एवं छाती में संक्रमण, श्वसन में परेशानी,कारबन मोनो आक्साइड –खाँसी, त्वचा में परेशानी, उच्च रक्त चाप, मानसिक एवं हृदय की बिमारियाँ उतपन्न, पोटेशियम नाइट्रेट जो  कैंसर के मुख्य वजह है. हाइड्रोजन सल्फाइड जो  छाती में दिक्कत, ब्रोमियम आक्साइट  आँखों की त्वचा  तथा गंध सूघने की क्षमता का नष्ट कर देता है। इसेक साथ ही उच्च शोर से मानव क कान को पर्दे भी फट सकते है। पटाखों के जलाने से बच्चें मानव बृद्ध के साथ-साथ पर्यावरण के अन्य जीव जन्तुओं पर भी इसका असर पड़ता है। जिससे जीवों पर संकट उत्पन्न हो गया है। अतः सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सराहनीय है। अब मानव को भी आगे आना होगा कोर्ट को इस कदम से कदम  मिलाना होगा तभी इस संकट स निजात मिल सकती है। वरना जीवों का जीना दुभर हो जायेगा। और मानव खुशियों की आड़ में अपना गला खुद घोंट लेगा।
 
लेखक- पर्यावरण प्रेमी एवं  साहित्य टी.वी. के संपादक है।
 

रविवार, 17 जुलाई 2022

खनकती आवाजों की मल्लिका बनी- अभिलिप्सा पांडा

 हर-हर शंभू ,शिव महादेवा वाइरल एलबम की गायिका


लाल बिहारी लाल




नई दिल्ली। उड़िया ,तेलगु के रास्ते हिंदी भजन में कैरियर की शुरुआत करने वाली खनकती आवाजों की मल्लिका अभिलिप्सा पांडा का जन्म ब्राह्मण परिवार में सन 2001 में उड़िसा के बारबिल गांव  जिला क्योझोर में हुआ था।

  अभिलिप्सा पांडा को संगीत विरासत में इनके दादा से मिला है जो  अपने ज़माने में हारमोनियम बजाने के लिए प्रसिद्ध थे। अभिलिप्सा का कहना है की पहली बार उनकी माताजी ने उन्हें गायत्री मन्त्र के जरिये संगीत से जोड़ा था जब वो एल.के.जी कक्षा में  केवल 4 वर्ष की थी। तभी से उड़ीसी क्लासिकल वोकल सीखना शुरू कर दिए था। लेकिन कुछ कारण वश उन्हें विराम देना पड़ा।

   अभिलिप्सा ने 2015 में द्रौपदी देवी कल्चरल इंस्टिट्यूट से हिंदुस्तानी वोकल सीखना शुरू किया। जब वह सिख रही थी तभी उनके गुरु ने उनसे पूछा कि क्या वह एक बच्चो के गाने को अपनी आवाज़ देंगी, तो इस पर अभिलिप्सा ने हाँ कर दी और इस प्रकार उन्होंने सिंगिंग इंडस्ट्री में पहला कदम रखा। साल 2017 – 18 में उन्होंने हिंदुस्तानी क्लासिकल वोकल में गवर्नर्स ट्रॉफी भी हासिल की। अभिलिप्सा ने एक ओड़िआ रियलिटी शो, उड़ीसा सुपर सिंगर में भी भाग लिया है। कुछ समय बाद ओडिसा सुपर सिंगर के निर्माताओं ने अभिलिप्सा की एक वीडियो क्लिप अलग- अलग सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। यह क्लिप जीतू शर्मा ने देखा,जो काफी पसंद आया औऱ फिर उन्होंने अभिलिप्सा के साथ हर हर शम्भू गाना गया जो संस्कृत मिक्स है और इसका संगीत दिया है युवा संगीतकार  आकाश देव ने। जो 5 मई 2022 को यू ट्यूब पर चढ़ाया गया है और इतना तेजी से दर्शको के बीच लोकप्रिय हुआ है कि आज लगभग दो महिने में 70 मिलियन से ज्यादा लोगो ने देखा है। इसके बाद दो गीत  मंजिल केदारनाथ और  भोले नाथ जी भी आये हैं जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया है। आशा है  अभिलिप्सा अपने गायिकी कैरियर को एक नया मुकाम तक ले जायेंगी।

युवा कवयित्री डाँ.आशा सिंह सिकरवार भोपाल में हुई सम्मानित

 युवा कवयित्री डाँ.आशा सिंह सिकरवार भोपाल में हुई सम्मानित 


लाल बिहारी लाल



नई दिल्ली । साहित्यिक संस्था निर्दलीय का 49 वां वार्षिकोत्सव सह साहित्योत्सव गांधी भवन,  भोपाल में  आयोजित किया गया । जिसकी  अद्य़क्षता साहित्यकार एवं निर्दलीय के सलाहकार श्री राजेन्द्र शर्मा अक्षर ने की मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के प्रथम चिकित्सा विश्वविद्यालय, जबलपुर के पूर्व कुलपति, डाँ.त्रिभुवन नाथ दुबे ,तथा अति विशिष्ट एवं विशिष्ट अतिथियों में सुश्री मेधा पाटकर, डाॅ.पवन कुमार भड़कतया जैन ( जबलपुर ),पूर्व मंत्री श्री दीपक जोशी एवं  श्री रमेश सिंह राघव (दिल्ली),श्री नीलकंठ राव यावलकर (अमरावती)श्री दयाराम नामदेव (सचिव-गांधी भवन न्यास ),श्री राजेश व्यास (सह सभापति-राज्य बार काउंसिल),श्री अब्दुल अज़ीज़ सिद्दकी (लखनऊ )श्री रमेश नंद ( वरिष्ठ कवि)एवं श्री शैलेश शुक्ला (पत्रकार) दुर्गा मिश्रा आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे । 


   राष्ट्रीय पुष्पेंद्र कविता सम्मान स्व. डाँ. रामघुलाम वैश्य रघु पूर्व दंत चिकित्साविशेषज्ञ की स्मृति में  श्री पुष्पेंद्र वैश्य श्रीमती कविता वैश्य, भोपाल द्वारा अहमदाबाद स्थित डाँ. आशा सिंह सिकरवार  को राष्ट्रीय शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया । इश असर पर 11 प्रांतों के  प्रतिष्ठित 58 सृजनधर्मियों को स्मानित किया गया। डाँ . आशा सिंह सिकरवार को अनेक पुरस्कार और सम्मान पहले भी प्राप्त हुए हैं । हाल ही में गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद के नये पाठयक्रम में  स्त्री विमर्श में ' उस औरत के बारे में 'काव्य संग्रह से  रचनाएँ शामिल हुई हैं ।   वे मुख्यधारा की महत्वपूर्ण कवयित्री में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं । आशा सिंह सिकरवार की लेखनी  ने कविता के अतिरिक्त ग़ज़ल, कहानी की  विधा को  अपनाया है । वे एक समीक्षक के रूप में में भी ख्याति प्राप्त हैं । उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं उन्हें देश विदेश की समस्त संस्थाओं द्वारा पुरस्कार एवं सम्मानित  भी किया जा चुका है ।

बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है इसे रोकना जरुरी

विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष (11जुलाई )

बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है इसे रोकना जरुरी है

लाल बिहारी लाल

++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

आज जनसंख्या रोकने के लिए सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा के साथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके । वर्ष 2021 में असम सरकार इस ओर सख्त पहल की है और उ.प्र. सरकार भी आज जनसंख्या स्थिरिकरण के लिए अनेक मसौदा जारी कर दी है। 

++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++






सन 1987 में विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार गई तभी से सारी दुनिया में जनसंख्या रोकने के लिए जागरुकता की शुरुआत के क्रम में 1987 से हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाते आ रहे हैं। इसका मुख्य उदेश्य बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न खतरों के प्रति आमजन के बीच में जागरुकता फैलाना है ताकि जनसंख्या निय़ंत्रण में आसानी हो। 

     आज सारी दुनिया की 90% आबादी इसके 10% भाग में निवास करती है।विश्व की आबादी कही 11-50/वर्ग कि.मी. है तो कही 200 वर्ग कि.मी.है।जनसंख्या वृद्धि के कई कारण है जो जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करते हैं।उनमें भौगोलिक,आर्थिक एवं सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारक प्रमुख है।भोगोलिक कारकों में मुख्य रुप से मीठे एवं सुलभ जल की उलब्धता, समतल एवं सपाट भूआकृति, अनुकुल जलवायु ,फसल युक्त उपजाऊ मिट्टी आदी  प्रमुख है।

आर्थिक कारकों में खनिज तत्व की उपलब्धता के कारण औद्योगिकरण तथा इसके फलस्वरुप शहरीकरण क्योंकि आधुनिक युग में स्वास्थ्य ,शिक्षा,परिवहन,बिजली तथा पानी आदी की समुचित उपलब्धता के कारण औद्योगिक कल-कारखाने में काम करने के लिए कर्मचारियो की जरुरत को कारण यहा की आबादी सघन होते जा रही है। इसके अलावे भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश उतरदायी है। उक्त कारकों  के अलावे जनसंख्या वृद्दि दर भी आज काफी है।पृथ्वी पर जनसंख्या आज 700 करोड़ से भी ज्यादा है। इस आकार तक जनसंख्या को पहूँचने में शताब्दियां लगी है।आरंभिक कालों में विश्व की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ी। यानी 1 अरब तक पहुँचने में 2,00,000 साल लगे वही 1 अरब से 7 अरब पहुँतने में मात्र 200 साल लगे। 

     विगत कुछ सौ बर्षों के दौरान ही जनसंख्या आश्चर्य दर से बढ़ी है। पहली शताब्दी में जनसंख्या 30 करोड़ से कम थी। 16वी.एवं 17वी शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के बाद तीब्र गति से जनसंख्या की वृद्दि हुई और सन 1750 तक 55 करोड़ हो गई। सन 1804 में 1 अरब,1927 में 2 अरब ,1960 में 3 अरब,1974 में 4 अरब तथा 1087 में 5 अरब हो गई और 7.78 अरब से ज्यादा हो गई है। । विगत 500वर्षों में प्रारंभिक एक करोड़ की जनसंख्या होने में 10 लाख से भी अधिक वर्ष लगे परन्तु 5 अरब से 6 अरब होने में 1987 से12 अक्टूबर 1999 तक मात्र 12 साल लगे। इसी तरह 31 अक्टूबर 2011 को 7 अरब हो गई। आज विश्व की जनसंख्या मार्च 2019 तक 7 अरब 53 करोड के आस पास थी। परन्तु 10 जुलाई 2022 को संध्या 4 बजे तक विश्व की जनसंख्या 7,97,65,99,776 थी।

   भारत आज 120 (139) करोड़ से अधिक आबादी के साथ चीन(1अरब 45करोड़ ) के बाद दूसरे नंबर पर है अगर इसी रफ्तार से भारत की जनसंख्या बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत 2025 में चीन को पीछा छोड़कर आबादी के मामलों में सारी दुनिया में  नंबर वन हो जायेगा। चिंता की बात है कि जहां 1951 में हिंदूओं की प्रतिशत संख्या लगभग 85 थी जो 2011 में 80 प्रतिशत के आस पास रह गई जबकि 1951 में मुस्लिमों की आबादी लगभग 10 प्रतिशत थी तो 2011 में लगभग 15 प्रतिशत हो गई। जबकि भूमि के मामले में भारत विश्व का 2.5% है और आबादी लगभग 17-18 % है। इस जनसंख्या विस्फोट से समाजिक ढ़ाचा परिवहन,शिक्षा स्वास्थ्य, बिजली , पानी आदी की मात्रा सीमित है जो समस्या बनेगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा और अनेक समस्याय़े खड़ी हो जायेगी। जिससे देश में सामाजिक ढाचा छिन्न-भिन्न(असहज) होने की संभावना बढ़ेगी। अतः आज जनसंख्या रोकने के लिए सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा के साथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके । वर्ष 2021 में असम सरकार इस ओर सख्त पहल की है और वर्ष 2021में उ.प्र. सरकार भी विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या स्थिरिकरण के लिए ड्राफ्ट जारी कर दी  है जिस पर सुझाव एवं आपतियाँ आमंत्रित की गई है। बढ़ती हुई जनसंख्या विकास में बाधक हो रही है इसे रोकना जरुरी है।

लेखक –पर्यावरण प्रेमी औऱ साहित्य टी.वी के संपादक है।

रविवार, 26 जून 2022

काव्य संकलन मणि की किरण का हुआ लोकार्पण

 मणि की किरण का लोकार्पण संपन्न

                   लाल बिहारी लाल      






 नई दिल्ली  ।  दिल्ली मेट्रों के डी सी पी जितेंद्र मणि द्वारा रचित पुस्तक ”, मणि की किरन,” जो कि एक काव्य संग्रह है और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय किरण मणि त्रिपाठी को समर्पित है का अनावरण माननीय आयुक्त महोदय दिल्ली पुलिस श्री राकेश अस्थाना , श्री दीपक मिश्रा सेवानिवृत्त आईपीएस पूर्व एसडीजी सीआरपीएफ , श्री सुधांशु त्रिवेदी माननीय सांसद  ,श्री राम मोहन मिश्र  सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवम पूर्व सचिव भारत सरकार, श्रीमती नुज़्हत हसन विशेष आयुक्त दिल्ली पुलिस एवं श्री  अमरेंद्र खटुआ  आई एफ एस पूर्व सचिव भारत सरकार के कर कमलों द्वारा एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर मे संपन्न हुआ   ,इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य अतिथियों  में श्री वीरेन्द्र सिंह चहल  विशेष आयुक्त दिल्ली पुलिस, श्री दीपेंद्र पाठक विशेष आयुक्त पुलिस, श्री मधुप तिवारी  विशेष आयुक्त दिल्ली पुलिस, श्री संजय सिंह विशेष आयुक्त दिल्ली, श्री संजय शुक्ला  आइएफएस सचिव इंडियन जू सोसाइटी, डॉ आलोक मिश्रा  ज्वाइंट सेक्रेटरी अखिल भारतीय विश्विद्यालय संघ, csc सी एस सी  दिल्ली मेट्रो , श्री शुवशेष चौधरी, ए डी सी पी रजनीश गुप्ता, डी सी पी रेलवे  श्री हरेंद्र कुमार सिंह  डी सी पी आई जी आई  तनु शर्मा, ब्रदर सुनिल शर्मा श्री आलोक यादव ज्योति मिश्रा राका विक्रम के पोरवाल रजनीश गर्ग अन्येष राय  सतीश तिवारी विवेक कुमार मिश्रा, संतोष मिश्रा ,रूपा सिंह आदित्य मणि प्रवीण बंसल, राहुल बंसल, प्रेम नाथ द्विवेदी  प्रसिद्ध शायर आदिल राशीद ,आचार्य शैलेश तिवारी  श्री अरूण सिन्हा ज्वाइंट सेक्रेटरी भारत सरकार सहित कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया, सभी मंच पर बैठे अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की एवम पुस्तक का विमोचन किया , पुस्तक की समीक्षा श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेई पूर्व एडीजी ऑल इंडिया रेडियो, श्रीमती अलका सिंह एवम नरेश शांडिल्य जी ने किया मंच संचालन  डॉ ज्योति ओझा  जी ने किया और पुस्तक का प्रकाशन  हिंदी सहोदरी की मुख्य संयोजक श्री  जय कान्त मिश्रा  जी ने किया । 

                इस अवसर पर  हास्य कवि श्री शंभू शिखर ने अपने काव्य पाठ से लोगो को गुदगुदाया सभी ने पुलिस विभाग ने होते हुए भी जितेंद्र मणि के संवेदनशीलता  ,अपनी पत्नी को विषय बना कर लिखी कविताओं  एवम काव्य प्रतिभा की भूरि भूरि प्रशंसा की ,पुलिस आयुक्त दिल्ली महोदय ने कहा कि पत्नी के असमय छोड़ की चले जाने की बाद जितेंद्र मणि की कार्य कुशलता में कोई कमी नही आई है और ये पूरी तत्परता और कार्य कुशलता से पुलिस सेवा कर रहें है। इस पुस्तक के आमदनी का कैंसर पीड़ितों पर खर्च किया जायेगा। यह पुस्तक फ्लिप कार्ट पर भी उपलब्ध है।

शुक्रवार, 17 जून 2022

रामनाथ पांडेय शिखर सम्मान से डॉ. मयंक मुरारी और डॉ.जौहर शफियाबादी हुए सम्मानित

 रामनाथ पांडेय शिखर सम्मान    

डॉ. मयंक मुरारी और डॉ.जौहर शफियाबादी सम्मानित

 लाल बिहारी लाल   





 नई दिल्ली l भोजपुरी के प्रथम उपन्यासकार रामनाथ पांडेय की पुण्यतिथि पर 16 जून को पटना में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें डॉ.मयंक मुरारी और डॉ.जौहर शफियाबादी को प्रथम रामनाथ पांडेय शिखर सम्मान प्रदान किया गया। दोनों विद्वानों को स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और शॉल से सम्मानित किया गया।

सारण भोजपुरिया समाज और जागृत प्रकाशन के तत्वावधान में मैत्री शांति भवन, अशोक राजपथ पर आयोजित इस कार्यक्रम में रामनाथ पांडेय की कालजयी रचना "महेन्दर मिसिर" का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रकेतु नारायण सिंह ने किया। अन्य मंचासीन अतिथियों में डॉ.सुनील पाठक, पूनम आनंद, तैय्यब हुसैन पीड़ित, भगवती प्रसाद द्विवेदी थे। लोकार्पण के बाद रामनाथ पांडेय जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर उपस्थित विद्वतजनों ने प्रकाश डाला। व्याख्यान के बाद काव्य पाठ का भी आयोजन हुआ। इसमें डॉ. मीना पांडेय, दिवाकर उपाध्याय, मधुरानी लाल, सुजीत सिंह सौरभ, श्याम श्रवण, सुधांशु कुमार सिंह ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। अन्य उपस्थित अतिथियों में भोजपुरी साहित्य जगत से जुड़ी कई हस्तियां  शामिल थीं,  जिनमें शुभ नारायण सिंह शुभ, राजेंद्र गुप्त, प्रेमलता, यशवंत मिश्रा, प्रणव पराग, रवि प्रकाश सूरज आदि प्रमुख थे। धन्यवाद ज्ञापन रामनाथ पांडेय के ज्येष्ठ सुपुत्र बिमलेंदु भूषण पांडेय ने किया तथा मंच संचालन दिवाकर उपाध्याय ने किया।

8 जून से चल रहा आयोजन

हर वर्ष की तरह इस बार भी कार्यक्रमों का सिलसिला रामनाथ पांडेय की जयंती 8 जून से प्रारंभ हुआ। 8 जून को चंपारण में 100 से ज्यादा कलाकारों का सम्मान किया गया। इसके साथ ही सारण भोजपुरिया समाज के पेज से हर दिन लाइव कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें एक दर्जन से ज्यादा विद्वानों ने भोजपुरी साहित्य व रामनाथ पांडेय की कृतियों पर अपने विचार व्यक्त कि

शनिवार, 4 जून 2022

तंबाकू छोड़ो जीवन से नाता जोड़ो

 तंबाकू छोड़ो जीवन से नाता जोड़ो

...........................................................................................................
तंबाकू के इतिहास की बात करे तो सन 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने  पहली बार  सैन साल्वाडोर द्वीप पर  तंबाकू की खोज की थी। और अपनी दूसरी यात्रा के दैरान  स्पेन में तंबाकू के पते लेकर आए। सन1558 में  तंबाकू के बीज पूरे यूरोप महाद्वीप में फैल गए और  उपनिवेशवादियों के  आक्रमण के साथ  धीरे –धीरे  यह सारी दुनिया में फैल गई ।
...........................................................................................................



लाल बिहारी लाल
 
 
सन 1988 से 31 मई को दुनिया भर में हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक प्रसार से नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर आम जन का ध्यान आकर्षित करना और इसके दुष्प्रभावो से जीवों को बचाना हैजो वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता हैजिनमें से 8,90,000 गैर-धूम्रपान करने वालों का परिणाम दूसरे नंबर पर हैं।  विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य देशों ने सबसे पहले  1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने को सोंचा औऱ सनं 1988 से लगातार मनाते आ रहे है। पिछले  तीन दसक से  दुनिया भर में  इसके पक्ष औऱ विपक्ष दोनों तरफ के लोग खड़े मिले है। विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 7 अप्रैल 1988 को एक संकल्प पारित किया जिसके  तहत 24 घंटे दुनिया को तंबाकू पर रोक लगाने का आह्वाहन किया गया जिससे इसे छोड़ने वाले को प्रेरित किया जा सके इसी सोंच का परिणाम निकला कि 31 मई 1988 से हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाते आ रहे है।
      तंबाकू के इतिहास की बात करे तो सन 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने  पहली बार  सैन सेल्वाडोर द्वीप पर  तंबाकू की खोज की थी। और अपनी दूसरी यात्रा के दैरान  स्पेन में तंबाकू के पते लेकर आए। सन1558 में  तंबाकू के बीज पूरे यूरोप महाद्वीप में फैल गए और  उपनिवेशवादियों के  आक्रमण के साथ  धीरे –धीरे  यह सारी दुनिया में फैल गई ।
     वर्ष 2003 में विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पहल पर तंबाकू निषेध के लिए एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संधि हुआ। वर्ष 2008 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ) की और से एक आह्वाहन  सारी दुनिया को की गई की तंबाकू के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाई जाये। वही इसे हर साल एक श्लोगन भी दिया जाने लगा बात करे 2017 का तो इस बर्ष का श्लोगन था- विकास के लिए खतरा , 2018 का  तंबाकू दिल तोड़ता है।  इस साल( 2022) का श्लोगन है- पर्यावरण के लिए खतररनाक है तंबाकू
      तंबाकू के सेवन से श्वसन तंत्र, हृदय तंत्र, पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र,  आदि के नुकसान होने के खतरे बढ़ जाते है। तंबाकू के सेवन से 30 प्रतिशत. कैंसर के मरीजों की संख्या है जिसमें लंग्स और मुँह के कैंसर मुख्य है। विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर साल 60 लाख लोग मरते है धूम्रपान  जनित रगो से यानी प्रति 6 सेकेंड में एक की मौत होती है। दुनिया में  उच्च रक्त चाप के बाद तंबाकू विश्व का दूसरा सबसे बड़ा  हत्यारा है। तंबाकु की खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति 35 लाख हेक्टेयर प्रति वर्य़ नष्ट हो जाते है जिसका असर सीधे पर्यावरण पर पड़ता है। तंबाकू उद्योग से हर साल 84 मीट्रिक टन कार्बन डाई आँक्साइड उत्सर्जित होते है जो वारतावरण को दूषित करते है।
 भारत में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम  की शुरुआत वर्ष 2007-08 में  21 राज्यों के 42 जिलो में पायलेट परियोजना के रूप में किया गया। सर्वप्रथम राजस्थान के जिलों जयपुर व झुंझुनू को सम्मिलित कर गतिविधियाँ प्रारम्भ की गयी। वर्ष 2015-16 में जयपुरझुन्झुनू के अतिरिक्त अजमेरटॉकचूरूउदयपुरराजसमन्दचित्तौडगढकोटाझालावाडभरतपुरसवाईमाधोपुरअलवरजैसलमेरपालीसिरोहीश्रीगंगानगर जिले (कुल 17 जिले) योजनान्तर्गत सम्मिलित किये गये । आज देश के कोने कोने में इस पर काम हो रहा है। इसका परिणाम भी सकारात्मक मिल रहा रहा है।
    आज जरुरी है कि ध्रूम्रपान को न कहा जाये क्योकि इसके परिणाम से कितना जीव और घऱ बर्वाद हो चुके है। स्वास्थ्य एं पर्यावर दोनों जरुरी है  इसलिए भारत को आज तंबाकू मुक्त बनाने की जरुरत है।

लेखक- साहित्य टी.वी के संपादक है