बुधवार, 22 मई 2024

सी.पी.सी.बी. कर्मचारी कल्याण संघ के स्थापना दिवस पर पहुंचे लाल बिहारी लाल

 

सी.पी.सी.बी. कर्मचारी कल्याण संघ नें मनाया अपना 39 वाँ स्थापना दिवस
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सोनू गुप्ता





नई दिल्ली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB के कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा अपना 39 वां स्थापना दिवस CPCB के प्रशिक्षण कक्ष में मनाया गया। कर्मचारी कल्याण संघ के महासचिव श्री के॰पी॰ राठी एवं श्री बीरेन्द्र सिंह, संयुक्त सचिव द्वारा यूनियन के स्थापना दिवस पर कार्यालय में मजबूत यूनियन की महत्ता को रेखांकित करते हुये कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।
कार्यक्रम में यूनियन की स्थापना से लेकर आज तक किये गये विभिन्न कल्याण कार्यों पर च्रर्चा हुई। इस संस्था के सभी कर्मचारी पेंशन के लिए काफी लंबे समय से संघर्षरत है। यूनियन के सभी सदस्यों द्वारा पेंशन मिलने तक यह लड़ाई जारी रखने एवं सी.पी.सी.बी. में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को योजनबद्ध तरीके से स्थायी कराने का संकल्प दोहराया। इस समारोह के मुख्य अतिथि यूनियन के संस्थापक सदस्य प्रताप सिंह शाही , यूनियन के भूतपूर्व महासचिव नरदेव सिंह तथा यूनियन के पूर्व अध्यक्ष विपिन कुमार गोयल ने कहा कि हम कर्मचारियों के हितो के लिए हर समय तत्पर है। वहीं NFCGA-EWO के अध्यक्ष घनश्याम चौहान, पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के यूनियन के पदाधिकारी ओमवीर सिंह भाटी ने भी इस संस्था को हर संभव सहयोग करने कl आश्वासन दिया।
संघ के पूर्व पदाधिकारियों प्रताप सिंह शाही, नरदेव सिंह, विपिन कुमार गोयल, घनश्याम चौहान, ओमवीर सिंह भाटी, एवं कर्मचारी कल्याण संघ के मीडिया प्रभारी लाल बिहारी लाल का सीपीसीबी यूनियन के कामरेड साथियों विनोद कुमार (अध्यक्ष), के॰पी॰ राठी (महासचिव), बीरेन्द्र सिंह (संयुक्त सचिव), जी.एम. खान (संगठन सचिव), सतीश कुमार, कार्यालय सचिव, रविंद्र कुमार कोषाध्यक्ष, सुभाष चंद उप-कोषाध्यक्ष, महेश, ब्रिजेश, मुकेश कुमार एवं श्रीमति अंजु भारद्वाज कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा इन सभी को मोमेंटो देकर स्वागत किया गया। इस प्रोग्राम की एंकरिंग सी.पी.सी.बी. के राजभाषा प्रभाग में कार्यरत श्रीमती पारूल राठी द्वारा की गई। अंत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने सभी आगन्तुकों को हार्दिक धन्यवाद दिया। 

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रविवार, 5 मई 2024

दिल्ली की फ़िरदौस ख़ान को मिला बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड

 

दिल्ली की फ़िरदौस ख़ान को मिला बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड  

 


-लाल बिहारी लाल

 

नई  दिल्ली। जल संरक्षण के लिए समर्पित मुम्बई की विश्व विख्यात संस्था ड्रॉप डेड फ़ाउंडेशनने फ़िरदौस ख़ान को उनके पानी बचाने के लिए किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया है। संस्था ने उन्हें साल 2023-2024 के बेस्ट वालंटियर अवॉर्ड से नवाज़ा है।

       ग़ौरतलब है कि सुप्रसिद्ध साहित्यकारचित्रकारकार्टूनिस्ट और पर्यावरणविद आबिद सुरती ने साल 2007 में मुम्बई में ड्रॉप डेड फ़ाउंडेशन की शुरुआत की थी। इसकी टैगलाइन है- सेव एवरी ड्रॉप ऑर ड्रॉप डेड। इसका मक़सद जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। इस मुहिम को देश ही नहींबल्कि दुनियाभर में सराहा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र भी इसे तवज्जो दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोल्हेम ने भी कई बार इसकी तारीफ़ की है।

       मार्च 2008 में फ़िल्म निर्माता शेखर कपूर जल संरक्षण पर फ़िल्म बना रहे थे। उन्होंने अपनी वेबसाइट पर इस मुहिम की ख़ूब तारीफ़ की थी। सुप्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने भी इसे सराहा है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी जल संरक्षण की इस मुहिम की सराहना करते हुए इसकी टीम को मुबारकबाद दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुहिम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इस पर वाटर वारियरनामक फ़िल्म बनवाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इससे बहुत मुतासिर हैं। उन्होंने आबिद सुरती साहब को दिल्ली बुलाया और उनके वॉटर मॉडल को अपने राज्य में लागू करने का फ़ैसला किया। देश की राजधानी दिल्ली भी जल संकट से जूझ रही है।

     फ़िरदौस ख़ान कहती हैं कि ज़मीन का दो तिहाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ हैलेकिन इसमें से पीने लायक़ पानी बहुत कम यानी सिर्फ़ ढाई फ़ीसद है। इस पानी का भी दो तिहाई हिस्सा बर्फ़ के रूप में है। दुनियाभर में जितना पानी हैउसका महज़ 0.08 फ़ीसद हिस्सा ही इंसानों के लिए मुहैया है। इंसानों की ख़ामियों की वजह से ये पानी भी लगातार दूषित होता जा रहा है। कारख़ानों और नालों की गंदगी नदियों के पानी को ज़हरीला बना रही है। पहाड़ों में मुसलसल खनन होने और जंगलों को काटने की वजह से बारिश पर असर पड़ रहा है। जब हम पानी पैदा नहीं कर सकतेतो फिर हमें इसे बर्बाद करने का क्या हक़ है?  वे कहती हैं कि जो रब से मुहब्बत करता है, वह उसकी क़ुदरत के ज़र्रे-ज़र्रे से भी मुहब्बत करता है। और जिस चीज़ से मुहब्बत की जाती हैतो उसकी हिफ़ाज़त करना भी लाज़िमी हो जाता है। वैसे भी पानी की हर बूंद अनमोल है। पानी के बिना ज़िन्दगी का तसव्वुर भी नहीं किया जा सकता। हर जानदार चीज़ को पानी की ज़रूरत होती है। इसलिए पानी को फ़िज़ूल न बहायेंक्योंकि इससे कितने ही लोगों के गले तर हो सकते हैं।  वे बताती हैं कि हमारे देश की ज़्यादातर आबादी धार्मिक है। इसलिए जल संरक्षण का संदेश देने के लिए विभिन्न धर्मों के पोस्टर बनवाए गये हैं। हर धार्मिक स्थल पर रोज़ाना सैकड़ों से लेकर हज़ारों लोग आते हैं। वे इन संदेशों को बार-बार देखेंगे, तो इस पर विचार करेंगे और पानी बचाने पर ध्यान देंगे। मुम्बई के बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर भी जल संरक्षण का संदेश छपे पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इस मुहिम को भरपूर जनसमर्थन मिल रहा है। आबिद सुरती साहब चाहते हैं कि ये मुहिम दुनिया के हर कोने तक पहुंचे। वे लोगों से अपील करती हैं कि वे इस मुहिम में बढ़ चढ़कर शिरकत करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से न जूझना पड़े।         

मंगलवार, 7 मार्च 2023

 विश्व पुस्तक मेला में लाल बिहारी लाल की पुस्तक संग्रह महंगी रोटी हुई लोकार्पित


सोनू गुप्ता



नई दिल्ली। दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला में नवजागरण प्रकाशन के स्टाँल पर कवि,लेखक एवं गीतकार सह साहित्य टी.वी. के संपादक लाल बिहारी लाल की लिखी हुई आजादी के अमृत महोत्सव पर 75 कविताओं का संग्रह महंगी रोटी का लोकार्पण- अंबेडकर फाउंडेशन के एडिटर सुधीर हिल्सयान, जामिया विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डा. राजेश मांझी,लोक सभा सचिवालय के एडिटर रण विजय राव,लेखक लाल बिहारी लाल,प्रकाशक राजकुमार अनुरागी,लेखिका प्रेम लता मुरार,मुम्बई से पधारे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार हरिश पाठक,लेखिका डा. संदेश रायपुरकार तथा लेखक अनिल मासूम ने किया।

  लाल बिहारी लाल पिछले दो दशक से साहित्य सेवा में सक्रिय है। उन्होंने 5 सहयोगी संकलन संपादित कर चुके है तथा 2017 से 2022 तक लगातार बदरपुर डायरेक्ट्री का भी संपादन किया है। वर्तमान में साहित्य टी.वी. के माध्यम से साहित्य सेवा में लगे हुए हैं।इनकी कवितायें,गीत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते रहती है।इनके लिखे सैकड़ों गीत विभिन्न संगीत कंपनियों से बाजार में उपलब्ध है। हाल ही में संगीता वर्मा की आवाज में होली गीत आया है।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

लाल बिहारी लाल विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित

 लाल बिहारी लाल  विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित




 

सोनू गुप्ता
 
++++देश के विभिन्न प्रांतो से 51 हिंदी सेवी सम्मानित++
 
 
 
नई दिल्ली। हिंदी की सेवा में दशकों से लगी देश की जानी मानी  संस्था जैमिनी अकादमी ,पानीपत द्वारा  विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से दिल्ली के लाल बिहारी लाल सहित  51 हिंदी के वरिष्ठ विभूतियों को डिजीटल रुप  हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है। संस्था के अध्यक्ष ड़ा. विजेन्द्र जैमिनी ने बताया कि आजकल करोना काल में फिजीकल के बजाये डिजीटल सम्मान दिया गया है।
    लाल बिहारी लाल पिछले दो दशक से हिदी सेवी के रुप में काफी योगदान दिया है। पत्रकार एंव गीतकार लाल बिहारी लाल को देश की कई संस्थाये विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित कर चुकी है। उनमें पर्य़ावरण प्रहरी,शब्द साधक, राष्ट्र गौरव, दिल्ली रत्न, राष्ट्रभाषा संरक्षक आदि ।  इनके गीतों को  मानविता मिडिया, टी. सारीज, रामा, मैक,मैक्स, यू.की., लाचो,सुरताल भारत महान म्यूजिक,प्रज्ञा म्यूजिक सहित देश के सभी संगीत कंपनियों के लिए सकड़ो गीत लिख चुके है। इनके दर्जनों गीत हिंदी और भोजपुरी में यू. ट्यूब पर भी विभिन्न गायक ,गायिकाओं के स्वर में उपलब्ध है। इनके कई गीत बहुत जल्द आने वाले हैं। इनकी कविता क्रान्ति बिहार के दो विश्वविद्यालयों में पढ़ायी जाती है।

 
 

शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

दीपावाली पर खुशियाँ ग्रीन पटाखों से ही मनायें और जीवन बचायें

 दीपावाली पर खुशियाँ ग्रीन पटाखों से ही  मनायें  और जीवन बचायें

 
लाल बिहारी लाल
 
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साधारण पटाखों से निकलने वाली गैसों में सल्फर डाई आंक्साइड-जिससे ,गले एवं छाती में संक्रमण, श्वसन में परेशानी,कारबन मोनो आक्साइड –खाँसी, त्वचा में परेशानी, उच्च रक्त चाप, मानसिक एवं हृदय की बिमारियाँ उतपन्न, पोटेशियम नाइट्रेट जो  कैंसर के मुख्य वजह है. हाइड्रोजन सल्फाइड जो  छाती में दिक्कत, ब्रोमियम आक्साइट  आँखों की त्वचा  तथा गंध सूघने की क्षमता का नष्ट कर देता है। इसेक साथ ही उच्च शोर से मानव क कान को पर्दे भी फट सकते है।
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नई दिल्ली। भगवान राम चंद्र कई दुर्दांत राक्षसों का वध कर वनवास से अयोध्या वापस  आये तो इसी खुशियों को मनाने के लिए पूरी अयोध्या को दीपों से सजाया गया था जो कलांतर में दीपावली का रुप ले लिया। पर धीरे-धीरे  खुशियाँ मनाने का तरीका बदल गया और आज हर मौसम या हर खुशी में पटाखों  को सुमार कर लिया गया है। बढ़ती हुई आबादी और घटते हुए वन ने पर्यावरण पर काफी दबाब बढ़ा दिया  है, ऐसे में इस मौसम में अन्य मौसम की तुलना में हवायें काफी प्रदूषित होती है उपर से पटाखो का शोर और धुआं जीवों के लिए काफी हानिकारक साबित हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर कई पर्यावरण संस्थानों के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2017 को देश में दीपावाली पर ग्रीन पटाखे को जलाने के लिए इजाजत दी थी यानी साधारण पटाखों पर बैन लगा दिया गया साथ ही साथ जलाने के समय सीमा भी रात्री में 8 बजे से 10 बजे निर्धारित कर दी औऱ यही प्रावधान वर्ष  2018,2019 भें भी लागू रहा । वर्ष 2020 मे करोना के कारण कुछ मौसम परिस्थितियाँ अनुकुल नही था पर पर्यावरण में काफी सुधार हुआ। वर्ष 2021 मे धीरे –धीरे सभी क्रिया कलाप पटरी पर लौट आई । वर्ष 2021 में दीपावली पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे ही जलाने की इजाजत दी है और  अधिकारियों पर जिम्मेदारी भी तय कर दी है।
  इस वर्ष संस्कृति की दुहाई देकर माननीय सांसद मनोज तिवारी छूट के लिए सुप्रीम कोर्ट गये थे पर छूट नहीं मिली।माननीय जज एम आऱ शाह की बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि कि आप भी दिल्ली और एन.सी.आर में रह कर इस तरह की बात कर रहे है। इन्होने ये भी कहा कि दिल्ली एन.सी.आर में दीवाली पर पटाखों पर बैन रहेगी 2 जनवरी 2023 तक वही देश के अन्य हिस्सों में पहले की तरह जारी रहेगा यानी ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत रहेगी। यह एक सकारात्मक पहल  है पर यह तभी संभव है जब जनता जागरुक हो और सरकार का हाथ बटाये वरना पटाखों के इस जलन से जीव संकट में आ जायेंगे। ।

  बात करते है ग्रीन पटाखों की तो दुनिया में चीन को बाद भारत दूसरे पायदान पर निर्माता(उत्पादक) के रुप में जाना जाता है। पटाखो के घटक में से अल्युमुनियम, बेरियम  पोटेशियम नाइट्रेट तथा कार्बन की मात्रा कम या बिल्कुल नगन्य कर दी जाती है तो यही पटाखे ग्रीन पटाखे कहलाती है। इन पटाखों से  वातावरण में 30-40% गैसे कम उत्यर्जित होती है जिससें वाताररण में 30-40 प्रतिशत  प्रदूषण कम फैलते हैं। इन पटाखो का निर्माण राष्ट्रीय पर्यावरण अभियंत्रिकी संस्थान (NEERI/निरी),पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संस्थान(PESO/पेसो) के सहयोग से सी.एस. आई. आऱ. ने बनाया है। इन्हीं के फर्मूला का उपयोग अन्य पटाखा उत्पादक कंपनिया करती है जिन पर इको/ग्रीन पटाखे का लोगो होता है। साधारण पटाखों से निकलने वाली गैसों में सल्फर डाई आंक्साइड-जिससे ,गले एवं छाती में संक्रमण, श्वसन में परेशानी,कारबन मोनो आक्साइड –खाँसी, त्वचा में परेशानी, उच्च रक्त चाप, मानसिक एवं हृदय की बिमारियाँ उतपन्न, पोटेशियम नाइट्रेट जो  कैंसर के मुख्य वजह है. हाइड्रोजन सल्फाइड जो  छाती में दिक्कत, ब्रोमियम आक्साइट  आँखों की त्वचा  तथा गंध सूघने की क्षमता का नष्ट कर देता है। इसेक साथ ही उच्च शोर से मानव क कान को पर्दे भी फट सकते है। पटाखों के जलाने से बच्चें मानव बृद्ध के साथ-साथ पर्यावरण के अन्य जीव जन्तुओं पर भी इसका असर पड़ता है। जिससे जीवों पर संकट उत्पन्न हो गया है। अतः सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सराहनीय है। अब मानव को भी आगे आना होगा कोर्ट को इस कदम से कदम  मिलाना होगा तभी इस संकट स निजात मिल सकती है। वरना जीवों का जीना दुभर हो जायेगा। और मानव खुशियों की आड़ में अपना गला खुद घोंट लेगा।
 
लेखक- पर्यावरण प्रेमी एवं  साहित्य टी.वी. के संपादक है।
 

रविवार, 17 जुलाई 2022

खनकती आवाजों की मल्लिका बनी- अभिलिप्सा पांडा

 हर-हर शंभू ,शिव महादेवा वाइरल एलबम की गायिका


लाल बिहारी लाल




नई दिल्ली। उड़िया ,तेलगु के रास्ते हिंदी भजन में कैरियर की शुरुआत करने वाली खनकती आवाजों की मल्लिका अभिलिप्सा पांडा का जन्म ब्राह्मण परिवार में सन 2001 में उड़िसा के बारबिल गांव  जिला क्योझोर में हुआ था।

  अभिलिप्सा पांडा को संगीत विरासत में इनके दादा से मिला है जो  अपने ज़माने में हारमोनियम बजाने के लिए प्रसिद्ध थे। अभिलिप्सा का कहना है की पहली बार उनकी माताजी ने उन्हें गायत्री मन्त्र के जरिये संगीत से जोड़ा था जब वो एल.के.जी कक्षा में  केवल 4 वर्ष की थी। तभी से उड़ीसी क्लासिकल वोकल सीखना शुरू कर दिए था। लेकिन कुछ कारण वश उन्हें विराम देना पड़ा।

   अभिलिप्सा ने 2015 में द्रौपदी देवी कल्चरल इंस्टिट्यूट से हिंदुस्तानी वोकल सीखना शुरू किया। जब वह सिख रही थी तभी उनके गुरु ने उनसे पूछा कि क्या वह एक बच्चो के गाने को अपनी आवाज़ देंगी, तो इस पर अभिलिप्सा ने हाँ कर दी और इस प्रकार उन्होंने सिंगिंग इंडस्ट्री में पहला कदम रखा। साल 2017 – 18 में उन्होंने हिंदुस्तानी क्लासिकल वोकल में गवर्नर्स ट्रॉफी भी हासिल की। अभिलिप्सा ने एक ओड़िआ रियलिटी शो, उड़ीसा सुपर सिंगर में भी भाग लिया है। कुछ समय बाद ओडिसा सुपर सिंगर के निर्माताओं ने अभिलिप्सा की एक वीडियो क्लिप अलग- अलग सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। यह क्लिप जीतू शर्मा ने देखा,जो काफी पसंद आया औऱ फिर उन्होंने अभिलिप्सा के साथ हर हर शम्भू गाना गया जो संस्कृत मिक्स है और इसका संगीत दिया है युवा संगीतकार  आकाश देव ने। जो 5 मई 2022 को यू ट्यूब पर चढ़ाया गया है और इतना तेजी से दर्शको के बीच लोकप्रिय हुआ है कि आज लगभग दो महिने में 70 मिलियन से ज्यादा लोगो ने देखा है। इसके बाद दो गीत  मंजिल केदारनाथ और  भोले नाथ जी भी आये हैं जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया है। आशा है  अभिलिप्सा अपने गायिकी कैरियर को एक नया मुकाम तक ले जायेंगी।

युवा कवयित्री डाँ.आशा सिंह सिकरवार भोपाल में हुई सम्मानित

 युवा कवयित्री डाँ.आशा सिंह सिकरवार भोपाल में हुई सम्मानित 


लाल बिहारी लाल



नई दिल्ली । साहित्यिक संस्था निर्दलीय का 49 वां वार्षिकोत्सव सह साहित्योत्सव गांधी भवन,  भोपाल में  आयोजित किया गया । जिसकी  अद्य़क्षता साहित्यकार एवं निर्दलीय के सलाहकार श्री राजेन्द्र शर्मा अक्षर ने की मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के प्रथम चिकित्सा विश्वविद्यालय, जबलपुर के पूर्व कुलपति, डाँ.त्रिभुवन नाथ दुबे ,तथा अति विशिष्ट एवं विशिष्ट अतिथियों में सुश्री मेधा पाटकर, डाॅ.पवन कुमार भड़कतया जैन ( जबलपुर ),पूर्व मंत्री श्री दीपक जोशी एवं  श्री रमेश सिंह राघव (दिल्ली),श्री नीलकंठ राव यावलकर (अमरावती)श्री दयाराम नामदेव (सचिव-गांधी भवन न्यास ),श्री राजेश व्यास (सह सभापति-राज्य बार काउंसिल),श्री अब्दुल अज़ीज़ सिद्दकी (लखनऊ )श्री रमेश नंद ( वरिष्ठ कवि)एवं श्री शैलेश शुक्ला (पत्रकार) दुर्गा मिश्रा आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे । 


   राष्ट्रीय पुष्पेंद्र कविता सम्मान स्व. डाँ. रामघुलाम वैश्य रघु पूर्व दंत चिकित्साविशेषज्ञ की स्मृति में  श्री पुष्पेंद्र वैश्य श्रीमती कविता वैश्य, भोपाल द्वारा अहमदाबाद स्थित डाँ. आशा सिंह सिकरवार  को राष्ट्रीय शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया । इश असर पर 11 प्रांतों के  प्रतिष्ठित 58 सृजनधर्मियों को स्मानित किया गया। डाँ . आशा सिंह सिकरवार को अनेक पुरस्कार और सम्मान पहले भी प्राप्त हुए हैं । हाल ही में गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद के नये पाठयक्रम में  स्त्री विमर्श में ' उस औरत के बारे में 'काव्य संग्रह से  रचनाएँ शामिल हुई हैं ।   वे मुख्यधारा की महत्वपूर्ण कवयित्री में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं । आशा सिंह सिकरवार की लेखनी  ने कविता के अतिरिक्त ग़ज़ल, कहानी की  विधा को  अपनाया है । वे एक समीक्षक के रूप में में भी ख्याति प्राप्त हैं । उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं उन्हें देश विदेश की समस्त संस्थाओं द्वारा पुरस्कार एवं सम्मानित  भी किया जा चुका है ।