शुक्रवार, 15 जून 2018


नदी की तरह आगे बढ़ते रहने का संदेश देती काव्य कृति – नदी के आस पास-लाल बिहारी लाल 



      दलित चेतना के प्रखर लेखक एवं कवि डा. राजेश कुमार माँझी की नवीनतम एकल काव्य संकलन  नदी के आसपास नाम से आया है। इस संग्रह में कुल 71 रचनायें हैं जो प्रार्थना से शुरु होकर  हिंद हमारा है पर खत्म हो रही हैं।  जिस तरह विश्व के अधिकांश सभ्यता नदियों के आस पास ही विकसित हुई है उसी तरह इस संकलन में समाज के विभिन्न रीतियों एवं कुरीतियों का संग्रह है। इस संकलन में मानो लेखक इस अंदाज में रचनाओं को पिरोया है जैसे वो खुद को अपने आप पर पाया है औऱ जीया है।
   कविताओं की मणिका में प्रार्थना के बाद माँ सरस्वती  को समर्पित शब्द समर्पण  के रुप में है। इसके आगे   इन्द्र धनुषी मौसम,पेयबंद लगा कपड़ा के बाद वास्तविक विकास के माध्यम से तंज कसते हुए कहते है- आजादी से आज तक,कहां प्रगति हुई है- आर्थिक,सामाजिक मुझे तो पता ही नही ।। दलितों की आवाज के हुंकार कविता में बुलंद किया है। गरीबों के दयनीय स्थिति पर उनके घर पलानी(झोपड़ी) में उनकी स्थिति को चिन्हित किया है। साथ ही दलित आजकल पढ़ लिख कर फूंफकार भी मारने लगे है ।यही कविता फूंफकार का संदेश है। डंके की चोट हो या मूल निवासी समान्य कवितायें हैं। लालची बुढिया थोड़ी लंबी कविता है पर शिक्षाप्रद कविता है। इसमें एक मछली का सहारा लेकर बातें कही गई है कि लालच बुरी बला है इससे बचना चाहिये जो काफी रोचक भी है। सबका एक दिन अंत होता है यही ध्रुव सत्य है चाहे लालच ही क्यों न हो। नई रीत मे जमाना बदल गया है और प्यार की रीत भी बदल दई है। जीवन के झंझावातो को ब्यक्त करती कविता- ये गई वो गई।जीवन के विभिन्न मोड़ पर कभी खुशी तो कभी गम आते हैं।इसी को पिरोया है पतझड़ में। एक साधारण मजदूर की ब्यथा को ब्यक्त किया है  बंधुआ मजदूर में। इसके अलावे दलित चेतना, नारी स्वर,पर्यावरण संदेश एवं चेतना, देश भक्ति से ओत प्रोत, रीतियो एवं कुरीतियों पर भी कई कवितायें हैं जो सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संदेश देती है।
     इस समाज में विड़ले ही मिलती है कुलिन लड़की, ताड़ की आड़ में सामाजिक रीतियो के दंश की बात है। जो दलितो के पीड़ा को ब्यक्त करती है।उल्टी बयार ,धूमिल अस्तित्व एवं सभी सच्चाई को द्य़ोतक हैं। यही कड़वा सच है कि समाज में  पहले भी ऊँच -नीच की खाई  थी और आज भी ब्याप्त है।लाख कोशिश कर ले सरकार या समाज पर यह ब्यवस्था बदल नहीं सकती है। आज के युग में हर मोड़ पर  परेशां आदमी है कि कभी कभी  उसे शोक सभा में भी जाने का मौका नहीं मिल पाता है। आदमी को एक नदी से सीख लेनी चाहिये औऱ उसी की तरह लाख बाधाये आने के बावयूद भी आगे बढ़ते रहना चाहिये। यही संदेश है इस कविता नदी के आस पास में।इस संकलन में कई ऐसी कवितायें हैं जो पर्यावरण संरक्षण पर बल देती है तो कई देश भक्ति की ओर उन्मुख करती है। इस तरह 71 कविताओं का यह अनूठा संग्रह साहित्य जगत में कितना मुकाम पाता है आने वाले दिनों में पाठक ही तय करेंगे। लेकिन लेखक को  तहे दिल से धन्यवाद की इस संग्रह में दलित पीड़ा को पूरजोर तरीके से उठाया है।
काब्य कृति- नदी के आस पास
कवि- डा. राजेश कुमार माँझी
प्रकाशक-नवजागरण प्रकाशन ,नई दिल्ली
मूल्य-250 रु., वर्ष -2018
समीक्षक-लाल बिहारी लाल
( वरिष्ठ कवि,लेखक एवं पत्रकाऱ)




गुरुवार, 14 जून 2018

कविता-कैसे गलेगी दाल सरकार आपकी-लाल बिहारी लाल

कविता- सरकार आपकी

लाल बिहारी लाल,नई दिल्ली

अब कैसे गलेगी दाल सरकार आपकी
जनता का हाल बेहाल सरकार आपकी
अब कैसे गलेगी दाल......

अच्छे दिनों का वादा करके सता में आये थे
बेरोजगारी महँगाई पर जनता को भाये थे
चार साल में जनता को कर दिया कंगाल
अब कैसे गलेगी दाल......

खत्म किया सब्सिडी सब, दाम बढ़ाया रोज
जनता करे त्राहि-त्राहि,मुश्किल हो गया भोज
बाबा रामदेव, अदानी हो गये मालामाल
अब कैसे गलेगी दाल......

सीमा पर सेना परेशान,खेतों में है किसान
आप सदा रहते है , अमीरों पर मेहरबान
कब तक रहेगी जनता ऐसे में फटेहाल
अब कैसे गलेगी दाल......

काम करो कुछ जनता का अब तो रखो ख्याल
करे निवेदन जनता खातिर लाल बिहारी लाल
चार साल में वादो पर जनता करे सवाल
अब कैसे गलेगी दाल......

मंगलवार, 12 जून 2018

छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण बचाया जा सकता है-लाल बिहारी लाल

छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण बचाया जा सकता है- लाल बिहारी लाल


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नई दिल्ली। इस संसार में कई ग्रह एवं उपग्रह हैं पर पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन एवं जीव पाये जाते हैं। धरती कभी आग का गोला थाजलवायु ने इसे रहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित समस्त जीवोंपेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और जीव एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति सत्य है बिना प्रकृति के न तो जीवन उत्पन्न हो सकता है और न ही जीव। इसीलिए प्रकृति मनुष्य को पर्यावरण संरक्षण की सीख देता है। हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से मिलकर बना है-क्षितिजजलपावकगगनसमीरा। पंच तत्व यह अधम शरीरा। इन पंच तत्त्वों के उचित अनुपात से ही चेतना (जीवन) उत्पन्न होती है। धरतीआकाशहवाआगऔर पानी इसी के संतुलित अनुपात से ही धरती पर जीवन और पर्यावरण निर्मित हुआ हैजो जीवन के मूल तत्व हैं। 
   आज बढती हुई आबादी के दंश से पर्यावरण का संतुलन तेजी से बिगड रहा है। और प्रकृति कूपित हो रही है। प्रकृति के किसी भी एक तत्व का संतुलन बिगड़ता हैतो इसका प्रभाव हमारे जीवन के ऊपर पड़ता है-मसलन- बाढ़भूस्खलनभूकंप,ज्वालामुखी उद्गार,सुमामी जैसी दैवीय आपदा सामने आती हैं। इस को ध्यान में रखकर सन 1972 में पर्यावरण के प्रति अमेरिका मे जून को चर्चा हुई औऱ तब से लेकर अब तक हर साल जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रुप में मनाते है। सन 1992 में 174 देशो के प्रतिनिधियों ने पर्यावरण के प्रति चिंता ब्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए ब्राजील के शहर रियों दी जनेरियो में पहला पृथ्वी सम्मेलन के तहत एक साथ बैठे। कलान्तर में सन 2002 में दक्षिणी अफ्रीकी शहर जोहान्सवर्ग में दूसरा पृथ्वी सम्मेलन हुआ। जिसमें चर्चा हुई कि पर्यावरण बचाने की दिम्मेदारी सभी राष्ट्रों की है पर ज्यादा खर्चा धनी देश करेंगे। पर पिछले 20साल के सफर में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।समाज एवं सरकारी स्तर पर देश दुनिया में काफी प्रयास हो रहे है। परन्तु यह प्रयास तभी कारगर हो सकती है जब हर जन इसके लिए आगे आये। इसके लिए समाज में जागरुकता की कमी को दूर करना होगा तभी इसके सकारात्मक फल मिल सकता है। हम और आप छोटे-छोटे प्रयास कर के इस बिगड़ते हुये पर्यावरण को ठीक कर सकते है। मसलन पानी की बर्बादी को रोकना,इसके लिए गाड़ी को सीधे नलके के बजाये बाल्टी में पानी भरकर गाड़ी को धोना,अपने घर में हो रहे पानी के लिकेज को रोकना गांव- मुहल्लों में बिना टोटी के बहते हुए पानी को रोकना इसके लिए पडोसी को भी जागरुक करना। ब्यक्तिगत वाहन के बजाये सार्वजनिक वाहन का उपयोग करना या फिर कार आदि को पूल करना।अपने घरों में छोटे-छोटे पौधे को गमले में उगाना। कागज के दोनों ओर लिखना। पुरानी किताबों को रद्दी बेंचने के बजाये किसी विद्याथी या पुस्तकालय को दान दे देना,घरो में अवश्यक रुप से बिजली के उपकरणों को चलाये रखने के बजाये उपयोग के बाद बंद कर दे। आदी जैसे बहुत से छोटे-छोटो उपाय है जिसे अपनाकर पर्यावरण का ख्याल रख के ही विभिनन् जल स्त्रोतों को बचाया जा सकता है । वनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। प्राकृतिक उर्जा स्त्रोतों का उपयोग किया जा सकता है। इस कार्य से पर्यावरण संरक्षण मैं अपनी भूमिका को साबित कर सकते है और इस पृथ्वी को आने वाले पीढी के लिए सुरक्षित बना सकते हैं।

   पर्यवारण के घटक वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली सरकार ने दिल्ली में दो वार ओड इभेन का फार्मूला अपना चुकी है पर पहली की तुलना में दूसरी कामयाब नही हो सकी।केन्द्र सरकार भी कई योजने बनाई है पर सही से कर्यान्वयन की कमी से इसका सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। आम जन-जन को जागरुक करना कारगर सिद्ध हो सकता है।
    अगर अब भी पर्यावरण के प्रति सचेत नही हुए तो बढ़ती हुई आबादी की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वन काटना होगा। जिससे प्रदूषण का असर औऱ बढ़ेगा।ग्लोबल वार्मिग होनगा जिससे वातावरण का ताप बढ़ेगा अंततः ग्लेशियर पिघलेंगे औऱ समुंद्र का जलस्तर बढ़ेगा औऱ पृथ्वी एक दिन जल में समा जायेगी।

सचिव लाल कला मंच,नई दिल्ली-110044  


बुधवार, 6 जून 2018

कवियों ने पर्यावरण दिवस पर वृक्ष लगाने का दिया सन्देश


कवियों ने  पर्यावरण दिवस पर वृक्ष लगाने का दिया सन्देश

लाल बिहारी लाल।



गाज़ियाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कवि एवं पर्यावरणविद् जगदीश मीणा के निवास स्थान वसुंधरा, गाज़ियाबाद में 'ट्रू मीडिया साहित्यिक मंच' के तत्वावधान में कई कवियों ने संतुलित पर्यावरण पर जोर देते हुए प्रदूषण मुक्त भारत बनाने का संदेश देती सुन्दर एवं प्रेरणादायक कविताएँ पढीं, जिससे आम जन पर्यावरण के प्रति सचेत रहकर प्रकृति के संसाधनों का दुरुपयोग रोकें और उसके निदान सुनिश्चित करें । कार्यक्रम से पहले कवि एवं पर्यावरणविद जगदीश मीणा पर एक डाक्यूमेंट्री लघु फिल्म दिखाई गई जिसके निर्माता-निर्देशक 'ट्रू मीडिया पत्रिका' के संपादक डॉ ओम प्रकाश प्रजापति हैं !
      कार्यक्रम की शुरुआत ममता लड़ीवाल सरस्वती वंदना हुई । कविता पाठ करने वाले कवियों में वरिष्ठ गीतकार डॉ जय सिंह आर्या, कवि मनोज कामदेव, सुन्दर सिंह, निर्देश शर्मा, संजय कुमार गिरि, जगदीश मीणा, सुश्री ममता लड़ीवाल प्रमुख रहे l मंच का शानदार संचालन युवा कवि सर्जन शीतल ने बहुत ही लाजबाब अंदाज़ में किया l इस अवसर पर बहु प्रतिभा के धनि कवि,पत्रकार एवं चित्रकार संजय कुमार गिरि द्वारा जगदीश मीणा उनकी धर्म पत्नी श्रीमती रजनी, डा. ओम प्रकाश प्रजापति और सुश्री ममता लड़ीवाल के बनाये सुन्दर स्केच उन्हें भेंट किये l काव्य गोष्ठी में आनंद वाटिका के माली जगत सिंह को उसके प्रशंसनीय कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया !
गोष्ठी के अंत में ट्रू मीडिया पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ ओमप्रकाश प्रजापति ने सभी का आभार व्यक्त किया l



शुक्रवार, 11 मई 2018

माँ " पर कुछ कवि एवं साहित्यकारों के रचनात्मक विचार

शीर्षक " माँ " पर कुछ कवि एवं साहित्यकारों के रचनात्मक विचार  


1-
माँ के क़दमों में है जन्नत ये बताने वाले
मुझको लगता है कि जन्नत से वो आगे न गए 

दीक्षित दनकौरी 
2-
जीवन के हर मोड़ पर, छले गए हर बार।
मां की ममता साथ थी,हार गया संसार।।

सरिता गुप्ता,दिल्ली
3-
माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार।
माँ बिन जीवन लाल का,समझो है बेकार।।
 लाल बिहारी लाल

4--
रहे खुद भूखी फिर भी , दे पेट भर खाना |
भाव है उसका ऐसा ,खिला खुश हो जाना ||

संजय वर्मा "दृष्टि" मनावर 
5--
मैं घंटे बतियाता हूं माँ की कब्र से,
एै "रंग"--एैसा लगता है की जैसे,
माँ की कब्र से भी अपने बेटे को दुआ आती है।

रंगनाथ द्विवेदी।
6--
माँ के कदमो में रहूँ, टूटे सभी गुरूर !
माँ ममता की छाव से , कभी न रखना दूर !!

कृष्णा नन्द तिवारी 
7--
माँ से ही संसार है,माँ ही ममता रूप।
देती सबको छाँव है,खुद सहती है धूप।।

मनोज कामदेव
8--
जाकर छत पर देखता ,चंदा तारे रोज ।
माँ उसको मिलती नहीं ,बालक करता खोज ।।

संजय कुमार गिरि
9--
मांग लूं यह मन्नत ,फिर यही जहाँ मिले
फिर यही गोद मिले , फिर यही माँ मिले 

माधवी राठी
10-
सुख-दुख दोनों में रहे, कोमल और उदार।
कैसी भी सन्तान हो, माँ देती है प्यार।।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक
प्रस्तुति :-श्री लाल बिहारी लाल 

संकलन कर्ता   :-संजय कुमार गिरि ,

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

लाल बिहारी लाल हुए सराहनीय कार्यो के लिए सम्मानित

लाल बिहारी लाल हुए सराहनीय कार्यो के लिए सम्मानित
सोनू गुप्ता
 

नई दिल्ली। भोजपुरी एवं हिंदी के जाने माने लेखक एंव वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय,भारत सरकार  के औद्योगिक नीति एंव संवर्धन विभाग में वरिष्ठ कार्यालय सहायक के रुप में कार्यरत लाल बिहारी गुप्ता उर्फ लाल को अपने दफ्तर में बेहतर कार्य करने के लिए वरिष्ठ भारतीय प्रसासनिक सेवा के अधिकारी (Sr.IAS) एवं औद्ययोगिक नीति एंव संवर्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक एंव संयुक्त  सचिव अतुल चतुर्वेदी  द्वारा एक भब्य समारोह में प्रशंसा पत्र द्वारा सम्मानित किया गया।
    श्री लाल को देश के सरकारी एवं गैरसरकारी विभिन्न संस्थाओं द्वारा सैकड़ो सम्मान एंव पुरस्कार मिल चुके है। हाल ही में इनके संपादन में बदरपुर डायरेक्ट्री 2018 आया है जिसे  काफी लोगो ने सराहा है। लाल हिंदी सेवी एवं समाजसेवी के रुप में अपनी पहचान बना चुके है। इस अवसर पर कई मित्रों ने इन्हें हार्दिक बधाई दी। उनके दो गीतों –परदेशी एवं सावरिया को रिकार्डिंग्स एम.आई मीडिया से हुई है जिसे स्वर दिया है गायिका अनिता तालुकदार ने जो बाजार में बहुत ही जल्द आने वाला है। 2017 में भी एम.आई मीडिया से कजरी एवं मैया मेरी आया छा जिसे स्वर दिया था सरिता साज तथा कंचन प्रिया ने। लाल टी.सीरीज,,एच.एम वी,वीनस सहित दर्जनों संगीत कंपनियो को लिए सैकड़ो गीत लिख चुके हैं। इनकी भोजपुरी कविता क्रांति विहार विश्वविद्यालय के बीए(स्नातक) तथा नालंदा औपेन विश्वविद्यालय के एम ए.(स्नातकोतर) पाठ्यक्रम में भी शामिल है। लाल की कई रचनाये विश्व कविता कोष में भी संग्रहित हैं। इनका रचना.यें मंत्रालय की पत्रिका सुगंधी सहित विभिन्न पत्र पकत्रिकाओं तथा कई पोरटल पर भी प्रकाशित होते रहती हैं।